
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस महकमे से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और प्रशासनिक गलियारों को हिला देने वाली खबर सामने आ रही है। भोपाल और इटारसी में टीआई (थाना प्रभारी) बनने की होड़ में अपने ही साथी पुलिस अफसरों पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाने वाली शासकीय रेल पुलिस (GRP) की महिला इंस्पेक्टर बबीता कठेरिया को सेवा से बर्खास्त (Dismiss) कर दिया गया है।
स्पेशल डीजी (रेलवे) राजाबाबू सिंह ने प्राथमिक जांच और विभागीय जांच की रिपोर्ट के आधार पर बबीता कठेरिया के खिलाफ यह बेहद सख्त और ऐतिहासिक कार्रवाई की है। इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा विवाद भोपाल और इटारसी जैसे मलाईदार थानों की टीआई (TI) की कुर्सी हथियाने की होड़ से जुड़ा है। इंस्पेक्टर बबीता कठेरिया खुद इन थानों का प्रभार चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने एक बेहद खतरनाक साजिश रची। उन्होंने इटारसी जीआरपी टीआई संजय चौकसे और भोपाल जीआरपी टीआई जहीर खान को उनके पदों से हटवाने के लिए आला अधिकारियों से लेकर लोकायुक्त तक में उनकी झूठी और फर्जी शिकायतें कर दीं।
जांच में खुली पोल: दूसरों के नाम से की थीं शिकायतें
जब इन दोनों टीआई के खिलाफ शिकायतों की गंभीरता से जांच की गई, तो परत दर परत चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में सामने आया कि इंस्पेक्टर बबीता कठेरिया ने इन दोनों अफसरों पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए बेनामी और दूसरों के नाम से फर्जी शिकायती पत्र भेजे थे। तकनीकी और आंतरिक जांच में यह पूरी तरह साबित हो गया कि इन झूठी शिकायतों के पीछे किसी बाहरी व्यक्ति का नहीं, बल्कि खुद इंस्पेक्टर कठेरिया का हाथ था।
स्पेशल DG राजाबाबू सिंह का सख्त एक्शन
विभागीय जांच में बबीता कठेरिया पर लगे अनुशासनहीनता, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और अपने ही साथी अधिकारियों की छवि धूमिल करने के आरोप सौ फीसदी सही पाए गए। स्पेशल डीजी राजाबाबू सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में इस तरह की गुटबाजी, कूटनीति और फर्जीवाड़ा कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने तत्काल प्रभाव से महिला इंस्पेक्टर को शासकीय सेवा से बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिए।
इस कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि कुर्सी की लालसा में अपनों के ही पैर खींचने और पुलिस विभाग की छवि को दांव पर लगाने वाले तत्वों पर गाज गिरना तय है।






