cjp 129 fir dismiss नई दिल्ली: देश के छात्र आंदोलन (Gen Z) के इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी 129 एफआईआर (FIR) को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन मुकदमों को तत्काल प्रभाव से खत्म करने का आदेश दिया।
चीफ जस्टिस ने कहा- ‘अब यह इतिहास का हिस्सा’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ दर्ज ये मुकदमे अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। अदालत के इस आदेश के बाद अब किसी भी छात्र के खिलाफ इन एफआईआर के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई या कानूनी प्रक्रिया नहीं चलाई जा सकेगी। न्यायालय ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के साथ-साथ बिहार, असम, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को भी निर्देश दिया है कि वे छात्रों के खिलाफ दर्ज प्रदर्शन से जुड़े सभी मामलों को तुरंत बंद करें।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ दर्ज ये मुकदमे अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। अदालत के इस आदेश के बाद अब किसी भी छात्र के खिलाफ इन एफआईआर के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई या कानूनी प्रक्रिया नहीं चलाई जा सकेगी। न्यायालय ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के साथ-साथ बिहार, असम, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को भी निर्देश दिया है कि वे छात्रों के खिलाफ दर्ज प्रदर्शन से जुड़े सभी मामलों को तुरंत बंद करें।
5 सितंबर का महामार्च वापस cjp 129 fir dismiss
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख और सरकार द्वारा अपनी मांगों को पूरा किए जाने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने राहत की सांस ली है। छात्रों के कोर ग्रुप ने घोषणा की है कि आगामी 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित उनका बड़ा मार्च और विरोध प्रदर्शन अब पूरी तरह से वापस ले लिया गया है। छात्रों का कहना है कि यह उनकी न्याय की लड़ाई में एक बड़ी और निर्णायक जीत है। cjp 129 fir dismiss
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख और सरकार द्वारा अपनी मांगों को पूरा किए जाने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने राहत की सांस ली है। छात्रों के कोर ग्रुप ने घोषणा की है कि आगामी 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित उनका बड़ा मार्च और विरोध प्रदर्शन अब पूरी तरह से वापस ले लिया गया है। छात्रों का कहना है कि यह उनकी न्याय की लड़ाई में एक बड़ी और निर्णायक जीत है। cjp 129 fir dismiss
नीति बनाने के लिए 3 महीने का समय
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ मुकदमे रद्द करने तक ही अपने आदेश को सीमित नहीं रखा। अदालत ने नीट (NEET) परीक्षा के अत्यधिक तनाव के कारण अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों की सुध भी ली। पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि ऐसे पीड़ित परिवारों को आर्थिक और मानसिक सहायता प्रदान करने के लिए आगामी तीन महीने के भीतर एक ठोस और प्रभावी नीति तैयार की जाए।cjp 129 fir dismiss
अदालत ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भविष्य में कोई भी नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी, जिससे युवाओं का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहे।
नीट (NEET) पीड़ितों के लिए नीति बनाने का निर्देश
अदालत ने केवल मुकदमों को रद्द करने तक ही अपने फैसले को सीमित नहीं रखा, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की चिंताओं पर भी गहरी संवेदनशीलता दिखाई। पीठ ने केंद्र सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि नीट (NEET) जैसी कठिन परीक्षाओं के अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण अपनी जान गंवाने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों की मदद की जाए। कोर्ट ने ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता और काउंसलिंग प्रदान करने के लिए आगामी तीन महीने के भीतर एक ठोस और प्रभावी राष्ट्रीय नीति तैयार करने का आदेश दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
क्या दी थी चेतावनी
CJP ने अपनी मुख्य मांगों को लेकर नाराजगी जताई थी :
- मुकदमे वापस लेना: जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज की गई एफआईआर (FIR) को सरकार ने अब तक वापस नहीं लिया है।
- मुआवजे की मांग: पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने के सदमे के कारण आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रतिबद्धता पूरी नहीं की गई।
- लिखित आश्वासन का अभाव: सरकार की तरफ से सुधारों को लेकर कोई औपचारिक या आधिकारिक लिखित संवाद नहीं भेजा गया है।
मार्च का रूट और CJP की तैयारी थी
पार्टी द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, 5 सितंबर को होने वाला था यह शांतिपूर्ण विरोध मार्च जो इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय (PHQ) तक जाता ।
- नेतृत्व: इस मार्च का नेतृत्व पुलिस बर्बरता के शिकार हुए युवाओं और पीड़ित छात्रों के परिजन करते ।
- अपील: संगठन ने देश भर के छात्र संगठनों, युवाओं और वॉलंटियर्स से अपील की है कि वे “सीजन 2” के इस बड़े आंदोलन के लिए पूरी तरह तैयार थे ।
CJP ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी थी कि सरकार युवाओं की ‘सद्भावना’ को उनकी ‘कमजोरी’ समझने की भूल कतई न करे।






