
rojgar sahayak news मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर पीठ) ने ग्राम रोजगार सहायकों (जिन्हें कई स्थानों पर सहायक सचिव भी कहा जाता है) की सेवाओं को नियमित (Regularise) करने की मांग को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर बेहद महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। माननीय न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित सक्षम प्राधिकारी को याचिकाकर्ताओं की मांगों पर कानून के दायरे में रहकर एक निश्चित समय सीमा के भीतर तर्कसंगत निर्णय लेने का सख्त निर्देश दिया है।
नियमितीकरण की मांग को लेकर दायर हुई थी रिट याचिका
यह पूरा मामला सचिन वासनिक एवं अन्य (Sachin Wasnik and Others) बनाम मध्य प्रदेश राज्य व अन्य (Writ Petition No. 33009 of 2026) से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता श्री रमन चौबे ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा कि ग्राम रोजगार सहायकों / सहायक सचिवों की सेवाओं को नियमित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। याचिका में भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत कोर्ट से हस्तक्षेप करने और सरकार को नियमितीकरण के संबंध में ‘परमादेश’ (Writ of Mandamus) जारी करने की गुहार लगाई गई थी।
सरकारी वकील को नहीं थी कोई आपत्ति, कोर्ट ने इस तरह निकाला रास्ता
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता श्री सुमित रघुवंशी ने याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई अंतरिम राहत (अधिकारियों के समक्ष नए सिरे से आवेदन देने) पर कोई आपत्ति नहीं जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय उच्च न्यायालय ने मामले को पूरी तरह से खारिज करने या लंबित रखने के बजाय एक व्यावहारिक रास्ता निकाला।
हाईकोर्ट की समयावधि: 15 दिन में आवेदन, 60 दिन में अंतिम फैसला rojgar sahayak news
माननीय न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने अपने आदेश में स्पष्ट समय सीमा तय करते हुए याचिका का निपटारा (Disposed of) कर दिया है:
- याचिकाकर्ताओं के लिए निर्देश: कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) मिलने की तारीख से 15 दिनों के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ सक्षम प्राधिकारी (प्रतिवादी क्रमांक 3) के समक्ष एक नया और विस्तृत प्रतिवेदन (Fresh Representation) प्रस्तुत करने की छूट दी है।
- सरकार/अधिकारियों के लिए निर्देश: इसके जवाब में, संबंधित सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे आवेदन प्राप्त होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर कानून के अनुसार एक स्पष्ट, तर्कसंगत और बोलता हुआ आदेश (Reasoned and Speaking Order) पारित कर अपना निर्णय लें और इसकी जानकारी याचिकाकर्ताओं को दें।
अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि हाईकोर्ट ने इस मामले के गुण-दोष (Merits of the case) पर अपनी कोई टिप्पणी या राय व्यक्त नहीं की है, बल्कि गेंद अब सरकार के पाले में डाल दी है। इस आदेश के बाद अब प्रदेश भर के ग्राम रोजगार सहायकों की निगाहें सरकार के अगले 60 दिनों के कदम पर टिक गई हैं।


मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
समक्ष:
माननीय न्यायमूर्ति श्री विवेक कुमार सिंह
दिनांक: 31 अगस्त, 2026
समक्ष:
माननीय न्यायमूर्ति श्री विवेक कुमार सिंह
दिनांक: 31 अगस्त, 2026
रिट याचिका संख्या: 23009 / 2026
सचिन वासनिक एवं अन्य
बनाम
मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य
सचिन वासनिक एवं अन्य
बनाम
मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य
उपस्थिति:
- श्री रमन चौबे – याचिकाकर्ताओं के वकील।
- श्री सुमित रघुवंशी – प्रतिवादी/राज्य के सरकारी वकील।
आदेश
यह याचिका याचिकाकर्ताओं द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई है, जिसमें निम्नलिखित राहतें मांगी गई हैं: rojgar sahayak news
- “मामले का रिकॉर्ड तलब किया जाए।”
- “परमादेश (Mandamus) के रूप में एक रिट जारी की जाए और प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाए कि वे याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को ‘सहायक सचिव’ (Sahayak Sachiv) या ‘सहायक सचिव’ (Assistant Secretary) के पद पर नियमित (Regularise) करें।”
- “कोई अन्य राहत जो यह माननीय न्यायालय उचित समझे।”
- याचिकाकर्ताओं के विद्वान वकील ने दलील दी कि उनकी शिकायत के निवारण के लिए, याचिकाकर्ताओं को प्रतिवादी नंबर 3/सक्षम प्राधिकारी के समक्ष एक नया अभ्यावेदन (Fresh Representation) प्रस्तुत करने की अनुमति दी जा सकती है और इसे एक निश्चित समय सीमा के भीतर तय करने का निर्देश दिया जा सकता है।
- प्रतिवादियों/राज्य की ओर से उपस्थित विद्वान वकील को याचिकाकर्ताओं द्वारा की गई इस प्रार्थना पर कोई आपत्ति नहीं है।
- उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, इस याचिका का निपटारा याचिकाकर्ताओं को यह निर्देश देते हुए किया जाता है कि वे सभी प्रासंगिक दस्तावेजों और इस आदेश की एक प्रति के साथ प्रतिवादी नंबर 3/सक्षम प्राधिकारी के समक्ष… rojgar sahayak news
… इस आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) प्राप्त होने की तारीख से 15 दिनों की अवधि के भीतर एक नया अभ्यावेदन (Representation) प्रस्तुत करें। इसके बाद, प्रतिवादी संख्या 3/सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया जाता है कि वे उक्त अभ्यावेदन की प्रस्तुति की तारीख से 60 दिनों की अवधि के भीतर कानून के अनुसार एक तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश (Reasoned and Speaking Order) पारित करके मामला तय करें और इसके परिणाम से याचिकाकर्ताओं को अवगत कराएं।
- यह स्पष्ट करने की आवश्यकता नहीं है कि इस न्यायालय ने मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।
- तदनुसार, याचिका का निपटारा किया जाता है। rojgar sahayak news
(विवेक कुमार सिंह)
न्यायाधीश
न्यायाधीश




