
वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सेन
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि **राज्य पुलिस** या उसकी विशेष एजेंसियां, जैसे **एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB)**, **केंद्र सरकार के कर्मचारियों** के खिलाफ **भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act, 1988)** के तहत अपराधों की जांच कर सकती हैं। ऐसे मामलों में **केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)** की पूर्व अनुमति या सहमति लेना जरूरी नहीं है।
### फैसले की मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें **न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला** और **न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा** शामिल थे, ने यह फैसला सुनाया। यह फैसला एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर आया, जिसमें राजस्थान हाई कोर्ट के अक्टूबर 2015 के फैसले को चुनौती दी गई थी। राजस्थान हाई कोर्ट ने एक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के खिलाफ राज्य के **एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB)** द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने “सही दृष्टिकोण” अपनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल **CBI** ही ऐसे मामलों में जांच या अभियोजन शुरू कर सकती है, ऐसा कहना गलत है।
### कानूनी आधार
– **भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act), 1988** के तहत अपराध **संज्ञेय अपराध (cognizable offences)** हैं।
– अधिनियम की **धारा 17** के अनुसार, जांच किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा की जा सकती है, बशर्ते वह निर्धारित रैंक का हो। यह धारा राज्य पुलिस या राज्य की विशेष एजेंसी को केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ जांच से नहीं रोकती।
– **दिल्ली स्पेशल पुलिस स्थापना अधिनियम (DSPE Act), 1946** के तहत CBI को केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार मामलों की जांच का अधिकार है, लेकिन इससे राज्य पुलिस की शक्तियों को छीना नहीं जाता।
– **CrPC की धारा 156** के तहत भी पुलिस स्टेशन प्रभारी को संज्ञेय अपराधों की जांच का अधिकार है, बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के।
– कोर्ट ने कहा कि राज्य पुलिस या ACB द्वारा शुरू की गई कार्यवाही को इसलिए अमान्य नहीं किया जा सकता क्योंकि CBI शामिल नहीं थी।
### फैसले का महत्व
यह फैसला राज्यों की जांच एजेंसियों को मजबूती देता है। अब राज्य स्तर पर भ्रष्टाचार के मामलों में तेज कार्रवाई संभव होगी, खासकर जब अपराध राज्य की सीमा में हुआ हो। इससे CBI पर अकेले निर्भरता कम होगी और जांच में दोहराव या देरी से बचा जा सकेगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि CBI एक विशेष एजेंसी है, जिसे केंद्र सरकार और उसके उपक्रमों से जुड़े मामलों के लिए जांच सौंपी जाती है, जबकि राज्य ACB राज्य कर्मचारियों के लिए। लेकिन कानूनन राज्य एजेंसियां केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती हैं।
यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे जांच के दायरे को व्यापक बनाया गया है और केंद्रीय कर्मचारियों को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।




