
ब्यूरो रिपोर्ट
मध्यप्रदेश में 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के झंडा वंदन की आधिकारिक सूची में नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम पूरी तरह गायब है। अपने ही प्रभार वाले जिले धार और सतना में मंत्री नहीं, कलेक्टर झंडा फहराएंगे।
इंदौर, जिसे विजयवर्गीय जी का राजनीतिक गढ़ कहा जाता है , वहाँ डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा को जिम्मेदारी दे दी गई। सीएम मोहन यादव खुद उज्जैन में झंडा फहराएंगे।
दरअसल गणतंत्र दिवस से जुड़ा सरकारी आदेश 21 जनवरी को शासन द्वारा जारी होता है। जिसमे कदावर मानेजाने वाले नेता नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम झंडा वंदन की आधिकारिक सूची में गायब होता है। जिसके बाद मंत्री जी मंत्री जी की और से सफ़ाई देने के लिए जो लेटर सामने लाया जाता है, उस पर तारीख 20 जनवरी की डाली जाती है ।
जबकि हकीकत ये है कि वही लेटर 21 जनवरी की रात करीब 9:30 बजे मीडिया में जारी किया गया था ।

मतलब साफ़ है — तारीख पीछे डालकर इज़्ज़त आगे बचाने की कोशिश। नैरेटिव मैनेजमेंट का सस्ता और घिसा-पिटा तरीका।
अगर मंत्री जी वाकई “अवकाश पर थे” तो उनका नाम पूरी सूची से ही क्यों काट दिया गया? अगर सब सामान्य था तो काग़ज़ों में हेरफेर की ज़रूरत क्यों पड़ी? राजनीति में कुछ भी संयोग नहीं होता। जब नाम लिस्ट से गायब होता है, तो समझ लीजिए — पावर भी गायब हो रही है। पहले जिम्मेदारी से हटाओ, फिर तारीख बदलकर सफ़ाई दो। खेला हो चुका है… अब सिर्फ़ काग़ज़ बोल रहे हैं।







