
ब्यूरो रिपोर्ट
बैतूल जिले के सारनी में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी शिक्षक सुनील चौधरी को न्यायालय से जमानत मिल गई है।
जमानत मिलने के बाद यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर से गरमा गया है और दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं:
1. शिक्षक पक्ष का पक्ष: ‘राजनीतिक साजिश का आरोप’
- एकतरफा कार्रवाई का दावा: जमानत मिलने के बाद शिक्षक सुनील चौधरी के परिवार और समर्थकों ने खुलकर पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने शिकायत मिलते ही बिना किसी प्रारंभिक या निष्पक्ष जांच के, दबाव में आकर बेहद जल्दबाजी में यह कार्रवाई की।
- गहन जांच की मांग: शिक्षक पक्ष का कहना है कि स्कूल के भीतर की परिस्थितियों और आपसी रंजिश के कोणों की गहनता से जांच की जानी चाहिए थी, क्योंकि उन्हें एक राजनीतिक साजिश के तहत झूठा फंसाया गया है।
2. पुलिस प्रशासन का रुख: ‘कानूनन सही कदम’
- शिकायत के आधार पर कार्रवाई: वहीं, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने शिक्षक पक्ष के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का साफ कहना है कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के थे, जिसके आधार पर कानून के दायरे में रहकर (विधिसम्मत) प्राथमिकी दर्ज की गई और गिरफ्तारी की गई।
- न्यायालय पर भरोसा: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की तफ्तीश पूरी तरह निष्पक्ष है और आगे की जांच कोर्ट के सामने पेश किए जाने वाले सबूतों और गवाहों के आधार पर ही आगे बढ़ेगी।
3. आगे क्या होगा?
न्यायालय से आरोपी शिक्षक को जमानत मिलने के बाद अब क्षेत्र के लोगों और पीड़ित परिवारों की नजरें पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट (चार्जशीट) पर टिकी हैं। पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किए जाने वाले तकनीकी साक्ष्य और छात्राओं के कलमबद्ध बयान ही अब इस केस का भविष्य तय करेंगे।