
भोपाल। मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों, आश्रम शालाओं और आवासीय विद्यालयों में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधीक्षकों (Hostel Wardens) के खिलाफ विभाग ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। कार्यालय आयुक्त, जनजातीय कार्य, मध्य प्रदेश द्वारा जारी एक नए और कड़े आदेश के तहत 07 वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही संस्था में पदस्थ अधीक्षकों को तत्काल प्रभाव से हटाने और उनके तबादले करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है ।
राजधानी भोपाल के आदि भवन (अरेरा हिल्स) से जारी आदेश क्रमांक शिक्षा स्थापना 3-4 / 19463 के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागीय उपायुक्तों और सहायक आयुक्तों/जिला संयोजकों को इस संबंध में समय-सीमा में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं ।
अतिरिक्त प्रभार वाले शिक्षक भेजे जाएंगे मूल शाला, हटेगा कब्जा
आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, विभाग में प्रशासनिक कसावट लाने के लिए निम्नलिखित कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं [Z3qGbm.png]:
- तत्काल प्रभार से मुक्ति: ऐसे शिक्षक जो किसी अन्य मूल संस्था (स्कूल) में पदस्थ हैं और उनका वेतन भी वहीं से आहरित हो रहा है, लेकिन वे छात्रावास अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से प्रभार मुक्त किया जाएगा । जिला कलेक्टर के अनुमोदन के उपरांत संबंधित छात्रावास के मुख्यालय की शाला के किसी अन्य योग्य शिक्षक को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी ।
- स्थानीय स्तर पर फेरबदल: जिन अधीक्षकों का मुख्यालय बदले बिना स्थानीय स्तर पर ट्रांसफर किया जाना है, उनके प्रस्ताव स्थानांतरण नीति-2026 की कंडिका 11 के तहत जिला कलेक्टर से अनुमोदित कराकर निर्धारित प्रपत्र-एक में आयुक्त कार्यालय को भेजने होंगे [Z3qGbm.png]।
- मुख्यालय परिवर्तन वाले ट्रांसफर: जिन अधीक्षकों के स्थानांतरण से उनका मूल मुख्यालय बदल रहा है, उनके प्रस्ताव भी कलेक्टर के अनुमोदन के साथ प्रपत्र-दो में विभाग को प्रेषित किए जाएंगे ।
AI और डेटा एनालिसिस से खुली थी लंबे समय से जमे होने की पोल
सूत्रों के अनुसार, विभाग द्वारा कराई गई कार्य-अवधि की समीक्षा में यह बात सामने आई थी कि कई जिलों में छात्रावास अधीक्षक नियमों को ताक पर रखकर 7 से 10 वर्षों से एक ही जगह पर जमे हुए हैं, जिससे व्यवस्थाओं में शिथिलता आ रही थी। विभाग ने अब प्रपत्र-तीन के माध्यम से ऐसी सभी संस्थाओं की जानकारी मांगी है जहां 7 साल से अधिक समय से कार्यरत अधीक्षक के हटने या दोहरे प्रभार से मुक्त होने के कारण पद रिक्त हो रहे हैं।
समय-सीमा में मांगी गई जानकारी, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
इस आदेश के बाद प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य जिलों जैसे धार, बड़वानी, झाबुआ, मण्डला और डिण्डौरी के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों की समीक्षा कर अनुमोदित सूची जल्द से जल्द मंत्रालय भेजें ताकि नए सत्र और आगामी महीनों में छात्रावासों की व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाया जा सके। तय समय में जानकारी न भेजने वाले अधिकारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।





