
वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सेन
कवर स्टोरी: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला – चोरी के बाद लगी आग से नुकसान पर बीमा दावा वैध, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड को झटका
**नई दिल्ली, 28 दिसंबर 2025**: सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि फायर इंश्योरेंस पॉलिसी में आग से हुए नुकसान की भरपाई के लिए आग लगने का कारण महत्वपूर्ण नहीं होता, जब तक कि वह कारण स्पष्ट रूप से पॉलिसी में बहिष्कृत (एक्सक्लूडेड) न हो। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की डिवीजन बेंच ने सीमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया बनाम आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मामले में बीमाधारक के पक्ष में फैसला सुनाया और नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (एनसीडीआरसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बीमा कंपनी द्वारा दावे को खारिज करने को सही ठहराया गया था।
कोर्ट ने कहा कि यदि आग (जो कवर्ड पेरिल है) से नुकसान हुआ है, तो आग लगने का कारण – चाहे वह चोरी/सेंधमारी का प्रयास हो – अप्रासंगिक है, क्योंकि पॉलिसी में आग से पहले चोरी को बहिष्कृत करने वाली कोई शर्त नहीं थी। बीमा कंपनी का तर्क कि निकटतम कारण (प्रॉक्सिमेट कॉज) चोरी था, जिसे रायट्स स्ट्राइक एंड मैलिशियस डैमेज (आरएसएमडी) क्लॉज में एक्सक्लूड किया गया है, को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
#### मामले की पृष्ठभूमि
सीमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की फैक्ट्री में चोरी का प्रयास हुआ, जिसमें चोरों ने सामान चुराने की कोशिश की और भागते समय आग लगा दी (या आग लग गई)। इससे बड़ा नुकसान हुआ। कंपनी ने फायर इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत दावा किया, लेकिन आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि निकटतम कारण चोरी/सेंधमारी था, जो कवर नहीं है। एनसीडीआरसी ने भी बीमा कंपनी के पक्ष में फैसला दिया था। सीमेंट कॉर्पोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
#### सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
– **आग से नुकसान का सिद्धांत**: फायर इंश्योरेंस कॉन्ट्रैक्ट आग से हुए नुकसान की भरपाई करता है। आग लगने का कारण (चाहे लापरवाही, अजनबियों का कार्य या चोरी का प्रयास) तब तक अप्रासंगिक है, जब तक कि वह स्पष्ट रूप से पॉलिसी में एक्सक्लूड न किया गया हो। यदि बीमाधारक ने खुद आग नहीं लगाई या धोखाधड़ी नहीं की, तो दावा वैध है।
– **प्रॉक्सिमेट कॉज का नियम सीमित**: निकटतम कारण का सिद्धांत मान्य है, लेकिन जहां आग स्पष्ट रूप से कवर्ड पेरिल है और उसकी अपनी अलग बहिष्कृत शर्तें हैं, वहां आरएसएमडी क्लॉज की बहिष्कृति को फायर पेरिल पर थोपा नहीं जा सकता।
– **बहिष्कृति क्लॉज की सख्त व्याख्या**: इंश्योरेंस कॉन्ट्रैक्ट में बहिष्कृति क्लॉज को सख्ती से पढ़ा जाता है। यदि कोई अस्पष्टता है, तो कॉन्ट्रा प्रोफेरेंटेम नियम लागू होता है – अर्थात व्याख्या बीमाधारक के पक्ष में की जाती है। पॉलिसी में सामान्य बहिष्कृति जो “किसी इंश्योर्ड पेरिल के दौरान या बाद में चोरी” को कवर नहीं करती, वह आग से पहले हुई चोरी पर लागू नहीं होती।
– **आरएसएमडी क्लॉज का दुरुपयोग नहीं**: कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग पेरिल्स (जैसे फायर और आरएसएमडी) की अपनी स्वतंत्र बहिष्कृतियां होती हैं। एक पेरिल की बहिष्कृति को दूसरे पर लागू नहीं किया जा सकता।
#### कोर्ट का अंतिम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीडीआरसी का फैसला रद्द कर दिया और मामले को वापस एनसीडीआरसी को भेज दिया ताकि दावे की राशि का आकलन किया जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह कार्य छह महीने के अंदर पूरा किया जाए।
यह फैसला बीमा कंपनियों के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि अब वे आग से हुए नुकसान के दावों को केवल इसलिए खारिज नहीं कर सकेंगी कि आग किसी बहिष्कृत कारण (जो स्पष्ट रूप से फायर पेरिल में एक्सक्लूड नहीं है) से लगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बीमाधारकों के अधिकार मजबूत होंगे और इंश्योरेंस क्लेम की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
(केस: सिविल अपील नं. 2052 ऑफ 2016; निर्णय दिनांक: 16 दिसंबर 2025; उद्धरण: 2025 INSC 1444)