
ब्यूरो रिपोर्ट
अटल मानव समस्या निवारण समिति (अटल सेना) द्वारा महिला स्व सहायता समूहों द्वारा स्कूलों में संचालित मध्यान भोजन योजना में कार्यरत रसोइया लाड़ली बहनों के हित में कई मांगो को ले कर आज मुख्यालय बैतूल में 1:30 बजे शहीद भवन से रैली निकाल प्रदर्शन करेंगे तथा कलेक्टर को ज्ञापन सौपेंगे।
महिला समूहों की समस्याओ पर लगातार शासन का ध्यानाकर्षण कराने वाले समिति के प्रांताध्यक्ष – राजेन्द्र सिंह चौहान (केंडु बाबा ) ने बताया की वर्ष 2007 से योजना में जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रो में स्कूलों तथा आंगनवाड़ी केन्द्रो में विसम परिस्थितियों में भी अनेकों महिला समूह कार्य कर रहे है।
जिसमे आंगनवाड़ी में जो रसोईया काम कर रही है जिन्हें मात्र 500/- महीना मिलता है। जो आज की मंगाई के दौर में ना काफी है। इसी तरह और भी कई समस्याएं है जिन पर शासन का ध्यान आकर्षण कराने आज रैली निकल प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौपा जाएगा।
क्या है मांगे
- अटल सेना बैतूल आपका ध्यानाकर्षण महिलाओं के हितों में चाहती है:- महंगाई को देखते हुए आंगनवाड़ी में जो रसोईया काम कर रही है जिन्हें मात्र 500/- महीना मिलता है उन्हें 3000 /- महीना किया जाए।
- स्कूल में ईंधन के नाम से जो गैस दी जाती है उसमें सब्सिडी दी जाए जैसे की लाडली बहनाओं को आधे दाम में गैस मिलती है। कलेक्टर रेट से रसोईया बहनों को मानदेय वेतन दिया जाए साल में दो ड्रेस उन्हें दी जाए। जिससे कि लगे कि वह एमडीएम रसोइया है उनका भी एक ड्रेस कोड होना चाहिए।
- 60 साल की आयु वाली किसी भी रसोईया को निकाला नहीं जाए। उनकी सेवानिवृत्ती सीमा 62 साल तक की जाए जैसे सरकारी कर्मचारी 62 साल तक काम करते हैं रसोइयों को भी वह दर्जा दिया जाए।
- जो समूह स्कूल में, सी.एम. राइस में काम कर रहे हैं ओर अन्य जगह काम कर रहे हैं वह यथावत काम करते रहे ठेका पद्धति लागू नहीं की जाए।
- महंगाई को देखते हुए प्राइमरी के बच्चों को प्रति बच्चा 15/- का रेट से एवं माध्यमिक शाला की प्रति बच्चा 20 /- दिया जाए। गुणवत्ता की जब बात होती है तो रेट भी महंगाई को देखते हुए गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए रेट का बढ़ना अतिआवश्यक है।
- मध्यान्ह भोजन संचालित कर रहा समूह का राशि हर महीने दी जाए और रसोईयों का मानदेय हर माह निर्धारित समय पर दिया जाए। 5-5 माह तक उन्हें राशि उपलब्ध नहीं हो पाती है जिससे कि घर चलना तो बहुत मुश्किल होता है। सैकड़ो बच्चों को भोजन करवाना भी कठिनाई का काम होता है और समूह कर्ज में डूब रहा है।