
ब्यूरो रिपोर्ट
बैतूल में चेक बाउंस केस: न्याय ने पीड़ित महिला को दी बड़ी जीत, आरोपी को 1 साल की सश्रम कारावास और 1.98 लाख का मुआवजा
**बैतूल, मध्य प्रदेश (18 जनवरी 2026)**: न्याय प्रणाली की मजबूती और पीड़ित महिला की दृढ़ता का एक शानदार उदाहरण पेश करते हुए बैतूल की न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी श्रीमती संधप्रिया भद्रसेन की अदालत ने चेक अनादरण (चेक बाउंस) के मामले में आरोपी धरमदास यादव को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को 1 वर्ष का सश्रम कारावास तथा पीड़िता श्रीमती रिजवाना खान को 1 लाख 98 हजार 750 रुपये की प्रतिकर राशि (मुआवजा) देने का आदेश दिया है।
यह मामला उन महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है जो आर्थिक धोखाधड़ी का शिकार होकर चुप रह जाती हैं। पीड़िता रिजवाना खान (पति जावेद खान), निवासी किदवई वार्ड, गौठाना, बैतूल ने आरोपी धरमदास पिता कन्हैयालाल यादव (निवासी गौठाना, बैतूल) के खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 138 के तहत परिवाद दाखिल किया था।
#### मामले की पूरी कहानी
पीड़िता ने बताया कि आरोपी से उनका लंबे समय से नगद लेन-देन चल रहा था। आरोपी ने किश्तों में बड़ी राशि उधार ली और अंत में पूरा ऋण चुकाने के लिए 1 लाख 75 हजार रुपये का चेक जारी किया। चेक बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गया। इसके बाद पीड़िता ने मांग सूचना पत्र भेजा, लेकिन आरोपी ने न तो जवाब दिया और न ही राशि लौटाई।
अदालत में पीड़िता ने बैंक स्टेटमेंट पेश कर राशि की उपलब्धता साबित की। आरोपी ने बचाव में दावा किया कि चेक केवल सुरक्षा (सिक्योरिटी) के तौर पर दिया गया था और मात्र 20 हजार रुपये का ही लेन-देन था। उसने स्वयं और बचाव साक्षी मेघा लकड़े का परीक्षण करवाया, पुलिस में दी गई शिकायत और अपना बैंक स्टेटमेंट पेश किया।
#### अदालत ने क्या पाया?
– पीड़िता ने बैंक स्टेटमेंट से लेन-देन साबित किया।
– आरोपी ने चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार किए।
– मांग सूचना पत्र सही पते पर भेजा गया था, लेकिन जवाब नहीं दिया गया।
– चेक को सुरक्षा बताने का दावा साबित नहीं हो सका।
– पुलिस में की गई शिकायत (मेघा लकड़े और उनकी मां रेणुका इंगले द्वारा) का इस चेक मामले से कोई संबंध नहीं था।
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता भारत सेन, प्रदीप रधुवंशी और अनुप सोनी ने मजबूत पैरवी की और सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण न्यायदृष्टांत पेश किए, जिनका फैसले पर गहरा प्रभाव पड़ा।
#### फैसला और सजा
दंडाधिकारी ने दाण्डिक परिवाद क्रमांक 541/2023 में 2 वर्ष 6 माह 28 दिनों की लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। आरोपी को 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 लाख 98 हजार 750 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
#### पीड़िता की प्रतिक्रिया
श्रीमती रिजवाना खान ने कहा, “यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं की है जो अपने हक के लिए लड़ती हैं। मैंने हिम्मत नहीं हारी और कानून ने मुझे न्याय दिया।”
#### इस मामले से सीखने योग्य महत्वपूर्ण सबक
1. **मांग नोटिस का जवाब न देना घातक है** – चेक बाउंस होने पर 30 दिनों में जवाब न देना आरोपी के लिए सबसे बड़ा नुकसान बन जाता है।
2. **बैंक स्टेटमेंट और रिकॉर्ड रखें** – हर लेन-देन का लिखित प्रमाण और बैंक रिकॉर्ड रखें।
3. **सुरक्षा चेक का दुरुपयोग न करें** – चेक को ‘सुरक्षा’ बताने का दावा साबित करना बहुत मुश्किल होता है।
4. **महिलाएं डरें नहीं** – आर्थिक धोखाधड़ी के खिलाफ मजबूती से लड़ें, सही वकील चुनें और सुप्रीम कोर्ट के दृष्टांतों का उपयोग करें।
5. **धैर्य रखें** – लंबी सुनवाई के बाद भी न्याय मिलता है।
यह फैसला चेक बाउंस मामलों में न्यायालयों की सख्ती का संदेश देता है और ईमानदार लेन-देन को प्रोत्साहित करता है। पीड़िता की जीत सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है।