
ब्यूरो रिपोर्ट
नर्मदापुरम जिले में महाशिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं की आस्था का अद्भुत जनसैलाब उमड़ा। 4000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित चौरागढ़ मंदिर से लेकर प्राचीन पाषाण प्रतिमा सोहागपुर, नर्मदापुरम बाबा काले महादेव, इटारसी के तिलक सिंदूर और शरद देव मंदिर, सिवनिमालवा के गणेश-शिव मंदिर एवं आंवली घाट पर स्थापित शिव प्रतिमा तक हर ओर भगवान भोलेनाथ के जयकारों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं की असीम श्रद्धा से पूरा जिला शिवमय नजर आया। जिला प्रशासन द्वारा सभी प्रमुख स्थलों पर व्यापक भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रशासनिक सतर्कता और समन्वय के चलते समस्त स्थानों पर पर्व पूरी श्रद्धा, भक्ति और शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।

महाशिवरात्रि पर आयोजित मेलों एवं धार्मिक आयोजनों की अधिकारियों द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग की गई। पचमढ़ी में कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक स्वयं उपस्थित रहकर महादेव मेले की व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रहे। वहीं सोहागपुर में आयोजित मेले का अपर कलेक्टर श्री राजीव रंजन पांडे द्वारा निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। इटारसी में तिलक सिंदूर मेले के दौरान अपर कलेक्टर श्री राजीव रंजन पांडे एवं एसडीएम श्री नितेश शर्मा मंदिर परिसर में मौजूद रहकर सभी इंतजामों की सतत निगरानी करते रहे। स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं स्वच्छता की दृष्टि से भी प्रशासन द्वारा हर एक पॉइंट पर अलग-अलग टीमों को तैनात किया गया था जिनके माध्यम से श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं एवं जानकारी का आदान-प्रदान निरंतर रूप से किया गया। आपदा प्रबंधन के लिए होमगार्ड एवं एसडीआरएफ की टीम द्वारा निरंतर रूप से श्रद्धालुओं की सहायता की गई। ऊंचे ऊंचे स्थलों तथा दुर्गम मार्गो से भी श्रद्धालुओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया गया। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा भी प्राथमिक उपचार की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर मेडिकल पॉइंट तथा एंबुलेंस की व्यवस्था की गई जिससे श्रद्धालुओं को हर संभव सहायता प्रदान की जा सके।

कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना ने देर रात पचमढ़ी पहुंचकर महादेव मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। शिवरात्रि पर्व के मद्देनज़र श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सतत मॉनिटरिंग बनाए रखने तथा सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने महादेव मंदिर, मंदिर पार्किंग तथा डीपी पॉइंट का भ्रमण कर सुरक्षा, यातायात, पेयजल, प्रकाश एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। कलेक्टर ने मेले में स्थापित विभिन्न मेडिकल पॉइंट पर पहुंचकर श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा अमले से उपचार व्यवस्था, उपलब्ध दवाइयों एवं आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की जानकारी ली और आवश्यकतानुसार तत्परता बनाए रखने के निर्देश दिए। इस दौरान पुलिस अधीक्षक श्री साइ कृष्ण एस थोटा, सीईओ जिला पंचायत श्री हिमांशु जैन, एसडीएम पिपरिया श्री आकिप खान सहित अन्य समस्त संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

पचमढी में महाशिवरात्री के पावन पर्व पर भक्तों के भारी जनसमूह से पूरा क्षेत्र किसी शिवधाम से कम नहीं लग रहा है। दुर्गम मार्ग होने के बाबजूद पूरी श्रद्धा एवं अस्था के साथ महादेव एवं चौरागढ जा रहे हैं। शिवरात्रि पर्व पर लगभग 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पचमढी को भगवान शिव की तपस्या स्थली माना जाता है। मान्यता है कि महारष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के लोग भगवान शिव को अपना बहनोई तथा देवी पार्वती को अपनी बहन मानते है, इसलिये विशेष रूप से विदर्भ के श्रद्धालू महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को त्रिशूल भेंट देने आते है। 4000 फिट से भी अधिक की ऊंचाई पर स्थित इस प्राचीन आस्था केंद्र पर भगवान चौड़ेश्वर् मंदिर में भगवान भोलेनाथ की प्राचीन शिवलिंग सहित मनमोहक प्रतिमा और चौरा बाबा की प्रतिमा भी स्थापित है। भक्तजन बडे बडे एवं सैकड़ों किलो भारी त्रिशूल लेकर अपने आरध्य को अर्पित करने के लिये दुर्गम रास्तों से पहुँचते हैं तथा कई श्रद्धालू अपनी मनोकामना पूरी होने पर ही मंदिर में त्रिशूल भेंट करते हैं। एक अन्य किवदंती के अनुसार चौरा महाराज की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन देकर यह वर दिया की यह दर्शन करने से सभी को मनोकना पूरी होगी। मनोकाना पूरी होने के बाद भक्त मन्नत रूपी त्रिशूल यहां चढ़ते हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए त्रिशूलों का अंबार लगा हुआ है जो इनकी अपने आराध्य के प्रति अटूट आस्था एवं भक्ति को परिलक्षित करता। इसी प्रकार पचमढ़ी स्थित जटाशंकर महादेव एवं गुप्त महादेव भी अपने पौराणिक महत्व को समेटे हुए हैं। चौरागढ़ महादेव के समांतर ही इन मंदिरों में भी भक्तों की लंबी कतारें इस दौरान देखी गई। उक्त दोनों मंदिरों में भी भक्तों ने दर्शन कर मनोकामना पूर्ति एवं कल्याण के लिए प्रार्थनाएं की।

जिला मुख्यालय पर मां नर्मदा के तट पर महाकाल मंदिर की तर्ज पर बना काले महादेव मंदिर स्थित है, जहां बाबा महाकाल की तर्ज पर पूजन होती है। काले महादेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का उज्जैन स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक बाबा महाकाल ज्योतिर्लिंग की तर्ज पर ही श्रृंगार एवं पूजन की जाती है। मान्यता है कि मंदिर में विराजित शिवलिंग पर लेपित हल्दी को लगा लेने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस मान्यता के चलते दूर-दराज से भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं।स्थानीय लोगो के अनुसार श्री काले महादेव के नाम से विख्यात यह मंदिर 200 वर्ष पुराना है। नर्मदा तट के किनारे स्थित शिव मंदिरों में यह एक प्रमुख और चमत्कारी शिव मंदिर है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के दौरान बाबा काले महादेव विशेष चल समारोह से नगर भ्रमण करते हुए मां नर्मदा के तट पर पहुंचते है। प्रशासन द्वारा पूरे चल समारोह के दौरान शोभायात्रा की निरंतर मॉनिटरिंग की गई। शोभायात्रा के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, एसडीओपी श्री जितेंद्र पाठक एवं टी श्रीमती कंचन ठाकुर शोभा यात्रा के समय उपस्थित रहे। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा यह सुनिश्चित किया गया की पूरी शोभायात्रा तथा संपूर्ण पर्व के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रम शांति एवं सम रूप से संपन्न हो सके।

नर्मदापुरम में स्थित प्राचीन तिलक सिंदूर मंदिर एक अनूठा धार्मिक स्थल है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है जहाँ भगवान शिव को सिंदूर चढ़ाया जाता है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी अनूठी परंपरा के लिए भी जाना जाता है। यह मंदिर सदियों पुराना माना जाता है। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, मंदिर का इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ भगवान शिव को जल, दूध या बेलपत्र के स्थान पर सिंदूर चढ़ाया जाता है। तिलक सिंदूर मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। प्रतिवर्ष तिलक सिंदूर क्षेत्र में मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रति वर्षानुसार तिलक सिंदूर मेले का स्थानीय प्रशासन एवं जन प्रतिनिधियों की उपस्थिति में मंदिर प्रांगण में झंडा चढ़ा कर शुभारंभ किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए मेले में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं की गई। मेले में विभिन्न दुकान आवंटित की गई। मेले में अन्य प्रकार की गतिविधियां जैसे रामसत्ता भजन, यज्ञ इत्यादि का भी आयोजन किया गया। मेले में वाहन पार्किंग के लिए दोपहिया, चार पहिया वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई, जिसमें लगभग 5000 दो पहिया वाहन एवं लगभग 1000 चार पहिया वाहन खड़े करने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। जिला खाद्य एवं सुरक्षा टीम ने भी मेले में खाद्य सामग्री की दुकानों का निरीक्षण कर सतत रूप से निगरानी की। मेले में पेयजल आदि की भी व्यवस्था की गई। मेला परिसर में पूर्ण रूप से स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी की गई एवं मेले की सुरक्षा एवं निगरानी के लिए पूर्ण मेले में सीसीटीवी कैमरा भी स्थापित किए गए। इटारसी में लगने वाले तिलक सिंदूर मेले के दौरान पूरे प्रशासनिक अमले द्वारा मेले पर निरंतर निगरानी रखी गई। तिलक सिंदूर मेले के दौरान अपर कलेक्टर श्री राजीव रंजन पांडे एवं एसडीएम श्री निलेश शर्मा मंदिर परिसर में मौजूद रहकर सभी इंतजामों की सतत मॉनिटरिंग करते रहे।

इटारसी शहर से मात्र 30 मिनट की दूरी पर स्थित शरद देव बाबा का मंदिर, जंगल के बीच एक पहाड़ी पर बसा हुआ है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ स्थापित प्राचीन शिवलिंग के लिए भी प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इस वर्ष भी मंदिर पर पहुंचकर कई श्रद्धालुओं ने बाबा शरद देव के दर्शन किए। यह मंदिर जिले के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है। यहाँ स्थापित शिवलिंग कई वर्ष पूर्व खुदाई के दौरान मिला था। शरद देव बाबा का मंदिर हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ का शांत वातावरण और प्राकृतिक दृश्य श्रद्धालुओं को एक अलग ही अनुभव प्रदान करते हैं। यह मंदिर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए आते हैं।

सोहागपुर में स्थित भगवान भोलेनाथ के मंदिर पर प्रतिवर्ष अनुसार लगने वाले महाशिवरात्रि मेले के दौरान भी भक्तों का तांता लगता है। यहां पर स्थित शिव मंदिर में प्रतिष्ठित शिव पार्वती प्रतिमा प्राचीनता एवं शिल्प कला का अद्भुत संगम है। मान्यता है कि शिव पार्वती प्रतिमा हजारों वर्ष पुरानी है तथा यह प्रतिमा खुदाई के दौरान मिली थी। सोहागपुर में भी प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी मेले का आयोजन किया गया है। प्रशासन द्वारा मेले के लिए समस्त आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई है। अधिकारियों द्वारा निरंतर रूप से मेले का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया जा रहा है। महाशिवरात्रि पर्व को दृष्टिगत रखते हुए अपर कलेक्टर श्री राजीव रंजन पांडे द्वारा महाशिवरात्रि मेले का निरीक्षण किया गया इस दौरान एसडीएम प्रियंका सहित तहसीलदार, सी एम ओ, एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।







