
सुखदेव मोहबे
सारनी/ क्षेत्र की भूमिगत कोयला खदान में कार्यरत मजदूरों को अब तक पूरा वेतन नहीं मिलने से प्रशासनिक अधिकारियों पर लग रहे आरोप,पाथाखेड़ा में मजदूरों के खून में दिखा उबाल। ठेकेदारों पर बड़े नेताओं के संरक्षण के आरोप, समाज सेवी नेताओ के अनुसार फिर भड़क सकता है आमरण अनशन के साथ आन्दोलन,सारनी के पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों के ठेका मजदूरों की 18 दिनों तक चली अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। हड़ताल समाप्त होने के चार दिन बाद भी मजदूरों के खातों में पूरा वेतन नहीं पहुंचने से क्षेत्र में आक्रोश तेजी से फैल रहा है। अब यह मामला केवल मजदूरों की परेशानी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मजदूरों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि वर्षों से कोयला खदानों में कार्यरत ठेकेदार मजदूरों की मेहनत की कमाई में कटौती कर अपनी तिजोरियां भरते रहे हैं और अब भी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे। पाथाखेड़ा से लेकर शहर के चौक-चौराहों तक प्रशासन और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।
बताया जा रहा है कि मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर रैली निकालकर बैतूल कलेक्टर तक अपनी आवाज पहुंचाई थी। कलेक्टर द्वारा 7 दिन में समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई ‘चींटी की चाल’ से भी धीमी नजर आ रही है। न तो अब तक प्रभावी कार्रवाई दिखी है और न ही ठेकेदारों पर कोई ठोस कदम उठाया गया है।
मजदूरों का आरोप: वेतन से जबरन वसूली और धमकी
मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उन्हें मिलने वाले 32500 से 34 हजार रुपये के वेतन में से बड़ी राशि लगभग 19 से 20 हजार तक ठेकेदारों द्वारा वापस ली जाती है।कई महिला मजदूरों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्हें 14 हजार में से 10 हजार रुपये तक लौटाने के लिए दबाव बनाया जाता है। इंकार करने पर उन्हें काम से हटाने, दूरस्थ स्थानों पर भेजने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की घटनाएं सामने आई हैं।
इतना ही नहीं, कुछ मामलों में ठेकेदारों द्वारा घर जाकर दबाव बनाने और बड़े नेताओं के संरक्षण की धमकी देने की बात भी सामने आई है। मजदूरों का दावा है कि उनके पास वसूली के वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे ठोस सबूत मौजूद हैं, बावजूद इसके प्रशासन की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार आदेशों की अवहेलना करने वाले ठेकेदारों पर ब्लैकलिस्ट जैसी कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।शहर में यह भी चर्चा है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारियों को आर्थिक लाभ मिलने की वजह से कार्रवाई में देरी हो रही है।
श्रम अधिकारी के आश्वासन की भी अनदेखी
भोपाल के श्रम अधिकारी आशीष गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद 16 तारीख को मजदूरों ने आंदोलन स्थगित किया था। समझौते के तहत तीन दिनों में पूरा वेतन मजदूरों के खातों में पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था। इस पर ठेकेदारों, प्रबंधन और श्रम अधिकारी के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। बावजूद इसके, तय समय सीमा बीतने के बाद भी भुगतान अधूरा रहना ठेकेदारों की मनमानी को उजागर करता है।
फिर भड़क सकता है आंदोलन
मजदूरों के भीतर अब आक्रोश सुलग रहा है, जो कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। समाजसेवी नेताओं प्रदीप नागले, मनोज पवार और संतोष देशमुख सहित अन्य मजदूर नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो पुनः अनिश्चितकालीन आंदोलन और अमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
पाथाखेड़ा क्षेत्र में मजदूरों का सब्र अब जवाब देने लगा है। यदि प्रशासन ने शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला न केवल श्रमिक असंतोष बल्कि व्यापक जनआक्रोश में बदल सकता है।






