
सुखदेव मोहबे
सारनी। पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों में पिछले 23 दिनों से काम पूरी तरह ठप है, लेकिन सबसे अधिक मार ठेका मजदूरों पर पड़ रही है। न तो उन्हें काम पर वापस लिया गया है और न ही उनका बकाया व नियमित वेतन खातों में डाला गया है। लगभग डेढ़ माह से वेतन भुगतान को लेकर संघर्ष कर रहे मजदूर अब आर्थिक तंगी के साथ-साथ मानसिक दबाव का भी सामना कर रहे हैं।
क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठान वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) पाथाखेड़ा की भूमिगत खदानों में उत्पन्न इस संकट ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मजदूरों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों और आंदोलनों के बावजूद न तो प्रबंधन ने ठोस पहल की और न ही स्थानीय प्रशासन ने प्रभावी हस्तक्षेप किया।
मजदूरों का कहना है कि वेतन भुगतान में वर्षों से अनियमितताएं जारी हैं। आरोप यह भी है कि बिना मजदूरों के हस्ताक्षर के ही वेतन संबंधी दस्तावेज तैयार कर ठेकेदारों को लाखों रुपये के बिल पास किए जा रहे हैं। इस पूरे मामले में अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
स्थानीय नागरिकों और समाजसेवी नेताओं ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि एक ओर गरीब मजदूर अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर ठेकेदार और कुछ जिम्मेदार अधिकारी इस व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के ढुलमुल रवैए को इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मौजूदा हालातों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि शीघ्र ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मजदूरों का आक्रोश और गहरा सकता है, जिससे क्षेत्र में व्यापक असंतोष की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।





