
ब्यूरो रिपोर्ट
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। एक शक्ति और चेतना के रूप जो सभी जीवों में विद्यमान है,उस देवी को नमन है, वंदन है। भारत की सांस्कृतिक परम्परा में नारी शक्ति प्राचीन काल से ही पूज्यनीय और वंदनीय रही है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि जब जब देश पर संकट आया है, अनाचार और अत्याचार बढ़ा है तब तब नारी शक्ति आगे आयी है। राक्षसों का वध किया है। युद्ध का नेतृत्व किया है। इस देश की संस्कृति एवं एवं सीमाओं की रक्षा में भी अपना अप्रतिम योगदान दिया है। महारानी लक्ष्मीबाई एवं रानी दुर्गावती जैसी अनेक वीरांगनाओं ने न सिर्फ राज काज सम्भाला बल्कि राज्य पर संकट आया तो शस्त्र भी उठाया। इस मातृभूमि और स्वयं की अस्मिता की रक्षा के लिए अपने प्राण भी उत्सर्ग किये।
देश की स्वतन्त्रता के बाद नारी के सशक्तिकरण के लिए अनेक कदम उठाए गए। शासकीय सेवा एवं स्थानीय निकायों में आरक्षण दिया गया। अनेक योजनाएं लागू की गई लेकिन अफसोस कि देश की दिशा और दशा तय करने वाली प्रक्रियाओं एवं नीतियो का निर्धारण करने वाली सर्वोच्च संस्था संसद एवं विधानसभाओ में महिलाओं की भागीदारी उनकी संख्या के अनुपात में नाम मात्र की रही।
लोक सभा एवं विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर बातें तो बहुत हुई लेकिन महिला आरक्षण बिल कभी पारित नही हो सका। देश की संसद ने वह दृश्य भी देखा है जब इस बिल को लोकसभा में फाड़ दिया गया। आजादी के 75 साल तक महिला विरोधी सोंच से ग्रसित कुछ राजनेताओं ने येन केन प्रकारेन इस बिल को पारित नही होने दिया। शिव शक्ति की आराधना करने वाले देश में शक्ति वर्षों तक उपेक्षित रही।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय ऐतेहासिक एवं स्वागत योग्य है। देश की संसद आज इतिहास रचने जा रही है। एक लंबी प्रतीक्षा के बाद महिलाओं को उसका फल मिलने जा रहा है। नारी शक्ति का मान और भारत माता का स्वाभिमान बढ़ने जा रहा है। अब शिव के निर्णय में शक्ति के सामंजस्य से 2047 में विकसित भारत का सपना साकार होगा। भारत अनन्त ऊंचाईयों को छूएगा।



