
भारती भूमरकर
ब्यूरो रिपोर्ट
- घटिया निर्माण पर भड़का छात्र संगठन: एनएसयूआई ने सौंपा ज्ञापन,
- साढ़े तीन करोड़ का भवन साढ़े तीन साल में बना छात्रों के लिए खतरा,सख्त कार्रवाई की मांग
सारनी।साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सरदार विष्णु सिंह उइके शासकीय महाविद्यालय, बगडोना के भवन में सामने आई गंभीर निर्माण खामियों को लेकर एनएसयूआई ने जोरदार विरोध दर्ज कराया है। संगठन के पदाधिकारियों और छात्रों ने प्राचार्य प्रदीप पेंद्रम को जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए ठेकेदार और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
एनएसयूआई छात्र नेता रोहन सिंह ठाकुर का आरोप है कि महाविद्यालय भवन का निर्माण कार्य अत्यंत घटिया गुणवत्ता के साथ किया गया है। निर्माण के कुछ ही समय बाद भवन में दरारें पड़ना शुरू हो गई हैं, दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है और छत से पानी टपकने की समस्या भी लगातार सामने आ रही है। भवन के दोनों ओर छत की सरिया पूरी तरह बाहर है,जो छात्रों और स्टाफ के लिए खतरा बना हुआ है,जिससे भवन की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं।

छात्र नेता रोहन सिंह ने बताया कि जिस भवन में छात्रों को उन्हें शिक्षा ग्रहण करनी है, वही अब उनके लिए खतरा बनता जा रहा है। कक्षाओं में बैठने के दौरान हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो कोई बड़ी अनहोनी भी हो सकती है।
एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि शासन द्वारा साढ़े करोड़ों रुपये खर्च करने बाद साढ़े तीन साल में भवन का जर्जर होना छात्रों की बेहतर सुविधाएं को चुनौती देता है, जिसका कारण भ्रष्टाचार और लापरवाही है। निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी साफ तौर पर दिखाई दे रही है।

संगठन ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। दोषी ठेकेदार, संबंधित इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण कर छात्रों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
ज्ञापन सौंपते समय एनएसयूआई के छात्र नेता रोहन सिंह ठाकुर,प्रकाश मालवीय,आसिफ अंसारी,ऋतु मस्की,तनीषा रावत,हर्ष ठाकुर,नावेद अंसारी,लकी,आदिल अंसारी,अभिषेक यादव,आकाश इवने,रेहान अंसारी,शुभ नागले और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
इस दौरान संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो एनएसयूआई उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।





