
ब्यूरो रिपोर्ट
न्यूजीलैंड के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को बैतूल जिले के पश्चिम वन मंडल अंतर्गत ग्राम पंचायत नाँदा पहुंचकर नाँदा हनी कलेक्शन एवं प्रसंस्करण व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। प्रतिनिधिमंडल ने शहद उत्पादन से जुड़े स्थानीय समूहों एवं कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी आजीविका गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।

ग्राम नाँदा स्थित फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में एसडीओ फॉरेस्ट श्री ध्रुव श्रीवास्तव ने प्रतिनिधिमंडल को नाँदा हनी की प्राथमिक प्रसंस्करण प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वन समिति के सदस्यों को मधुमक्खी पालन एवं शहद संग्रहण का प्रशिक्षण देकर आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में हनी कलेक्शन सेंटर स्थापित होने के बाद शहद के मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले शहद का मूल्य लगभग 55 रुपए प्रति किलो था, जो वर्तमान में बढ़कर लगभग 280 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को शहद की शुद्धता, नमी परीक्षण, लैब टेस्टिंग, संग्रहण, पैकेजिंग तथा सहकारी समितियों के माध्यम से औद्योगिक इकाइयों तक विपणन की संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने शहद प्रसंस्करण में अपनाए जा रहे मानक मापदंड, एडल्ट्रेशन नियंत्रण, औषधीय उपयोग तथा गुणवत्ता परीक्षण संबंधी पहलुओं पर विशेष रुचि दिखाई। साथ ही न्यूजीलैंड के उन्नत एपिकल्चर तकनीकी अनुभवों के आदान-प्रदान एवं तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

फॉरेस्ट रेस्ट हाउस भ्रमण के पश्चात प्रतिनिधिमंडल ने प्राथमिक प्रोसेसिंग सेंटर पहुंचकर शहद प्रसंस्करण की संपूर्ण प्रक्रिया का अवलोकन किया। यहां उन्हें रॉ मैटीरियल संग्रहण से लेकर लैब टेस्टिंग, अर्ध-स्वचालित मशीनों से शहद भरने तथा पैकेजिंग की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने प्रसंस्करण इकाई में अपनाई जा रही गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्थाओं की सराहना की।

एसडीओ फॉरेस्ट श्री श्रीवास्तव ने बताया कि नाँदा हनी की नियंत्रित नमी इसकी विशेष पहचान है, जिसके कारण इसकी मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि यहां शहद के साथ-साथ वैक्स का भी उत्पादन किया जा रहा है, जिसका औषधीय उपयोग किया जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल में श्री ईशान जयवर्धने, लीड एडवाइजर – ट्रेड प्लान इम्प्लीमेंटेशन, मिनिस्ट्री फॉर प्राइमरी इंडस्ट्रीज न्यूजीलैंड, श्री बायरन पीटर टेलर, एपिकल्चर टेक्निकल मैनेजर, एश्योर क्वालिटी लिमिटेड तथा सुश्री प्रियम अरोड़ा, एग्रीकल्चरल पार्टनरशिप मैनेजर, न्यूजीलैंड हाई कमीशन शामिल रहे। इस दौरान वन मंडल अधिकारी श्री नवीन गर्ग भी उपस्थित रहे।

इससे पूर्व जनजातीय कलाकारों द्वारा पारंपरिक जनजातीय नृत्य प्रस्तुत कर प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने वन क्षेत्र में पहुंचकर पेड़ों पर बने छत्तों से सुरक्षा उपकरणों की सहायता से शहद संग्रहण का प्रदर्शन भी देखा तथा स्थानीय वर्कर्स द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।






