
वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सेन बैतूल -98273 06273
*बैतूल (मध्य प्रदेश),* रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने चेक संबंधी फ्रॉड रोकने के लिए *पॉजिटिव पेमेंट सिस्टम (PPS)* 1 जनवरी 2021 से लागू किया। यह प्रणाली मुख्य रूप से ₹50,000 और उससे अधिक मूल्य के चेकों के लिए CTS (Cheque Truncation System) में लागू है। चेक जारीकर्ता को चेक के प्रमुख विवरण (जैसे चेक नंबर, तारीख, राशि, प्राप्तकर्ता का नाम) बैंक को पहले से पुष्टि करनी होती है। यदि पुष्टि नहीं होती, तो भुगतानकर्ता बैंक चेक को “Positive Pay details not received/mismatch” जैसे कारण से लौटा देता है।
*सुधार:* सभी बैंकों (सरकारी और निजी) ने RBI के निर्देशानुसार इसे लागू किया है, हालांकि व्यावहारिक स्तर पर कुछ बैंकों में अपडेट/पंजीकरण की प्रक्रिया में देरी या कमियां देखी गई हैं। निजी क्षेत्र के बैंको में पीपीएस को बैंकिंग व्यवसाय में एक बाधा माना जाता हैं और लागू नहीं किया गया हैं।
### बैतूल अदालत के मामले (तथ्यात्मक आधार पर)
– *एससीएनआईए 0260/2024: पंजाब ज्वेलर्स के संचालक **भूपिंदर सिंह पोपली* पर ₹42 लाख के चेक अनादरण का मामला। बैंक ने PPS के कारण चेक लौटाया। चेक धारक ने *धारा 138* (Negotiable Instruments Act, 1881) के तहत परिवाद दायर किया, जिसे न्यायालय ने दर्ज किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता *भारत सेन* मामले में तर्क पेश कर रहे हैं।
– *एसएसीएनआईए 724/2025*: संजय राठौर पर ₹3 लाख के चेक का मामला। बैंक ने PPS अपडेट न होने के कारण चेक वापस किया। अधिवक्ता भारत सेन ने चार्ज फ्रेमिंग पर डिस्चार्ज की याचिका दायर की है।
*महत्वपूर्ण तथ्य:* इन मामलों में चेक “बाउंस” (अपर्याप्त धनराशि) नहीं हुआ, बल्कि PPS प्रक्रियागत अनुपालन न होने के कारण लौटाया गया।
### कानूनी संदर्भ (सुधारित)
– सुप्रीम कोर्ट के *Indian Bank Association vs Union of India (2014) AIR 2014 SC 2528* में धारा 138 मामलों के शीघ्र निपटान के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए।
– *In Re: Expeditious Trial of Cases under Section 138 of N.I. Act, 1881 (AIR 2021 SC 1957)* में भी समन/समरी ट्रायल की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए।
*पुरानी CrPC (1973) की धारा 251* में समन मामलों में प्रारंभिक डिस्चार्ज की स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी, जिससे आरोपी को अनावश्यक मुकदमेबाजी का सामना करना पड़ता था।
*नया कानून — BNSS 2023:* धारा *274* में अब विचारण न्यायालय (Magistrate) को यदि आरोप आधारहीन (groundless) लगे, तो लिखित कारणों के साथ आरोपी को रिलीज (डिस्चार्ज के प्रभाव के साथ) करने की शक्ति दी गई है। यह पुरानी व्यवस्था से एक महत्वपूर्ण सुधार है।
### समस्याएं और सुझाव
PPS का उद्देश्य फ्रॉड रोकना है, लेकिन प्रक्रियागत खामियों के कारण निर्दोष चेक जारीकर्ताओं पर धारा 138 के मामले दर्ज हो रहे हैं। इससे आर्थिक, मानसिक और समय की बर्बादी होती है।
*व्यावहारिक सलाह:*
– बड़े मूल्य के चेक जारी करते समय अपने बैंक ऐप/नेट बैंकिंग के माध्यम से *PPS* विवरण अवश्य अपडेट करें।
– चेक लौटने पर बैंक से विस्तृत मेमो लें और तुरंत कानूनी सलाह लें।
– RBI को सभी बैंकों में PPS की एकसमान और सुगम क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।
*न्यायालयों के लिए:* PPS वापसी वाले मामलों में चेक रिटर्न मेमो को प्रारंभिक चरण में ही गंभीरता से जांचें, ताकि एनआई एक्ट धारा 138 के तहत अनावश्यक मुकदमों को रोका जा सके। प्रारंभिक तौर पर अपराध गठित नहीं होता हैं या चैक अनादरण का कारण कानून के दायरे से बाहर हैं तो आरोप तय करने से परहेज करना चाहिए।
यह प्रकरण तकनीकी प्रगति और कानूनी प्रक्रिया के बीच सामंजस्य की जरूरत को रेखांकित करता है। सही दस्तावेजों के साथ PPS अनुपालन सुनिश्चित करने से ऐसे विवादों से बचा जा सकता है।