
बैतूल। सनातन हिन्दू धर्म के शास्त्रों में देवताओं और पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण का अत्यधिक महत्व है जिसे ध्यान रखते हुए पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की सत्प्रेरणा से संत श्री आशारामजी आश्रम, रानीपुर रोड, चिखलार बैतूल में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी 10 अक्टूबर शनिवार को प्रातः 10 बजे से सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर सामूहिक श्राद्ध एवं तर्पण का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसके अंतर्गत वेदविद्या में प्रवीण विद्वान ब्राह्मणों द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पितरों का तर्पण कराया गया तत्पश्चात दोपहर एक बजे से सामूहिक भोज का आयोजन हुआ।
समिति संरक्षक राजेश मदान ने श्राद्धकर्म का महत्व बताते हुए कहा कि अपने पितरों की सद्गति एवं शांति के लिए श्रद्धापूर्वक श्राद्धकर्म अवश्य ही करना चाहिए। शास्त्रों में श्राद्धकर्म को ऋषिऋण, पितृऋण एवं देवऋण से मुक्ति का साधन बताया गया है। श्राद्धकर्म करने वाला आयु, यश, कीर्ति, बुद्धि, सुख-संपदा एवं पुण्य का भागी बनता है। सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों का श्रद्धापूर्वक तर्पण करने से उनका शुभ आशीष प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता जीवित हों या दिवंगत, प्रत्येक व्यक्ति को अपनी परंपरा के अनुसार श्राद्ध-तर्पण अवश्य ही करना चाहिए।

श्राद्धकर्ताओ की संपूर्ण पूजन सामग्री आश्रम में ही उपलब्ध कराई गई थी।
जिले के सैकड़ों साधकों एवं धर्मप्रेमी जनता ने सामूहिक श्राद्ध तर्पण आयोजन में सहभागी बनकर अपने पितरों के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता अर्पित की। श्री मदान ने बताया कि सोमवार को दोपहर 12 बजे चिखलार स्थित आश्रम में पूज्य बापूजी का आत्म साक्षात्कार दिवस पूर्ण हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। जिसमें जिले के समस्त साधकों एवं धर्मप्रेमी जनता से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया गया है।




