
भोपाल। मध्य प्रदेश जनजातीय कार्य विभाग ने प्रदेश के छात्रावासों और आश्रम शालाओं की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। विभाग के आयुक्त द्वारा जारी सख्त निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य जिलों के छात्रावासों, आश्रमों और आवासीय विद्यालयों में पिछले 7 वर्ष या उससे अधिक समय से लगातार पदस्थ अधीक्षकों को अनिवार्य रूप से हटाया जा रहा है।
इस पूरी स्थानांतरण और नवीन पदस्थापना प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए e-HRMS (मानव संपदा) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संचालित किया जा रहा है।
दोबारा नहीं मिलेगा प्रभार, मूल शिक्षण कार्य में होगी वापसी
विभाग के नए नियमानुसार, जो अधीक्षक एक ही संस्था में अपनी 7 साल की अधिकतम समय सीमा पूरी कर चुके हैं, उन्हें दोबारा किसी भी अन्य छात्रावास या आश्रम में अधीक्षक का प्रभार नहीं दिया जाएगा। इन सभी शिक्षकों को उनके मूल संवर्ग (शिक्षण कार्य) में वापस शालाओं में भेजा जाएगा। नियमों के मुताबिक अधीक्षक का कार्यकाल सामान्यतः 3 वर्ष का होता है, जिसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाकर अधिकतम 5 वर्ष किया जा सकता था, लेकिन कई स्थानों पर वर्षों से जमे अधीक्षकों के कारण यह सख्त कदम उठाना पड़ा है।
चॉइस फिलिंग का दूसरा चरण 12 अक्टूबर से शुरू
पोर्टल पर पहले चरण की प्रक्रिया (5 से 7 अक्टूबर) पूरी हो चुकी है। अब विभाग द्वारा 12 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2026 तक द्वितीय चरण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
- पहले चरण के बाद खाली रह गए रिक्त पदों के लिए पात्र कर्मचारी e-HRMS पोर्टल पर लॉगिन करके अपनी चॉइस फिलिंग कर सकते हैं।
- कर्मचारियों को अपनी पसंद के अधिकतम 15 संस्थाओं/स्थानों का विकल्प चुनने की स्वतंत्रता दी गई है।
नई गाइडलाइंस के कड़े नियम:
- एक अधीक्षक, एक संस्था: अब किसी भी शिक्षक या अधीक्षक को एक से अधिक छात्रावास या आश्रम का अतिरिक्त प्रभार (Double Charge) नहीं दिया जाएगा।
- कन्या छात्रावासों में केवल महिला अधीक्षक: बालिकाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी कन्या आश्रमों, बालिका छात्रावासों और कन्या आवासीय विद्यालयों में केवल महिला शिक्षिकाओं को ही अधीक्षक के पद पर नियुक्त किया जाएगा।
- गलत जानकारी देने पर कड़ी कार्रवाई: यदि किसी कर्मचारी द्वारा चॉइस फिलिंग या सत्यापन में गलत जानकारी दी जाती है, तो संबंधित कर्मचारी और उसकी जानकारी को सत्यापित करने वाले जिला अधिकारी दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के इस कड़े रुख से वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधीक्षकों में हड़कंप मच गया है, वहीं व्यवस्थाओं में पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई जा रही है।






