
शिव धनुष टूटते ही जय-जय श्री राम के उद्घोष से गूंजा रामलीला मैदान, सीता स्वयंवर के बाद आज निकलेगी भव्य राम बारात
रामलीला के मंच पर सजा जनक दरबार, लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने दर्शकों को किया भाव विभोर
बैतूल। राजा जनक के दरबार में शिव धनुष टूटते ही गूंजे जय श्रीराम के उद्घोष और माता सीता द्वारा प्रभु श्रीराम को वरमाला पहनाने के दृश्य ने रामलीला मैदान को भक्तिमय कर दिया। बैतूल गंज स्थित रामलीला मैदान में श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति, बैतूल द्वारा आयोजित 69वें रामलीला व दशहरा उत्सव की पांचवीं शाम 14 अक्टूबर को धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। रीवा के प्रसिद्ध श्री गणेश रामलीला मंडल, मऊगंज के कलाकारों ने अभिनय से दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा।

बुधवार रात 9 बजे शुरू हुए मंचन में राजा जनक के दरबार का दृश्य प्रस्तुत किया गया। देश-विदेश से आए प्रतापी राजा शिव धनुष को हिला तक नहीं सके। इससे राजा जनक व्याकुल हो उठे। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु श्रीराम ने सहजता से धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई, तभी धनुष दो टुकड़ों में टूट गया। धनुष भंग होते ही पुष्पवर्षा और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला पहनाई। इस दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
धनुष टूटने की प्रचंड ध्वनि सुनकर जनकपुरी पहुंचे भगवान परशुराम और राजकुमार लक्ष्मण के बीच संवाद प्रसंग ने मंचन में रोमांच भर दिया। कलाकारों ने बुलंद आवाज, सटीक संवाद अदायगी और प्रभावी भाव-भंगिमाओं से भगवान परशुराम के क्रोध तथा लक्ष्मण की तर्कपूर्ण और ओजस्वी वाकपटुता को जीवंत किया। इस दौरान दर्शकों में खासा उत्साह दिखाई दिया।
– श्री कृष्ण मंदिर से निकलेगी राम बारात
उत्सव के छठवें दिन गुरुवार, 15 अक्टूबर को भव्य श्रीराम बारात निकाली जाएगी। रात 8 बजे बारात श्री कृष्ण मंदिर से गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ प्रारंभ होकर माता मंदिर, पेट्रोल पंप, बैतूल गंज ( सांकेतिक जनकपुरी ) पहुंचेगी। यहां प्रभु श्रीराम और माता सीता का पावन विवाह संपन्न होगा। इस अवसर पर रीवा के प्रसिद्ध श्री गणेश रामलीला मंडल, मऊगंज के कलाकार मंच पर श्रीराम विवाह जुलूस और राम कलेवा का सजीव मंचन करेंगे। पंजाब युवा सेवा समिति एवं श्री कृष्ण पंजाबी महिला कीर्तन मंडल, बैतूल के सहयोग से आयोजित विवाहोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। आयोजकों द्वारा दर्शनार्थियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।




