
सांईखेड़ा: मेघनाद रावण और मंदोदरी का सबसे बड़ा पुत्र था। इसमें देवराज इंद्र को भी परास्त किया था, इसलिए ब्रह्मा जी ने उसे ‘इंद्रजीत’ नाम दिया था।
* गुप्त यज्ञ: युद्ध के दौरान मेघनाद निकुम्मिला देवी के गुप्त मंदिर में छिपकर एक तांत्रिक यज्ञ कर रहा था, जिसे पूरा करने के बाद उसे एक अजेय दिव्य रथ और शक्ति मिलने वाली थी। विभीषण के बताने पर लक्ष्मण वानर सेना के साथ वहां पहुंचे और यज्ञ को विध्वंस किया।
* वध की शर्त: मेघनाद को ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसका वध केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसने लगातार 14 वर्षों तक न तो अन्न ग्रहण किया हो, न ही नींद ली हो और जिसने किसी पराई स्त्री का मुख न देखा हो।
* लक्ष्मण की भूमिका: वनवास के दौरान लक्ष्मण जी ने 14 वर्षों तक कड़ा त्याग किया था, जिससे यह शर्त पूरी हुई और उन्होंने अंततः युद्धभूमि में मेघनाद का वध किया।
मेघनाद जिसे राजपुत्र मेघनाद या इन्द्रजीत के नाम से भी जाना जाता है, लंका के राजा रावण का पुत्र था। अपने पिता की तरह यह भी स्वर्ग विजयी था।





