
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में खरीद और अन्य कार्यों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विभागीय कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब विभागीय जांच तेज हो गई है। जिसमे प्रदेश के आठ संभागों में करीब 62 प्रकरणों से जुड़े 146 अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध अलग-अलग तरह की कार्रवाई दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सात कर्मचारियों को सेवा से हटाने, 76 कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकने, 17 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन या महंगाई राहत में कटौती तथा 38 मामलों में आर्थिक नुकसान की वसूली के आदेश दिए गए।
वहीं, जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होने पर 22 कर्मचारियों को दोषमुक्त किया गया, जबकि दो मामलों में संबंधित कर्मचारियों की मृत्यु के कारण कार्रवाई समाप्त की गई।
अलग-अलग निकायों में बाजार दर से अधिक कीमत पर सामग्री खरीदने, निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने और टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए खरीद को छोटे हिस्सों में बांटने जैसी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में सतना, सिवनी, रीवा, शहडोल, ग्वालियर, भोपाल सहित विभिन्न क्षेत्रों के मामले सामने आए हैं। सतना के कोटर में वाटर टैंकर और ट्रैक्टर-ट्रॉली की अधिक कीमत पर खरीद का मामला दर्ज है। सिवनी में हाईमास्ट पोल, लाइट और अन्य सामग्री की खरीद पर कार्रवाई की गई। रीवा सहित अन्य निकायों में भी खरीद संबंधी मामलों की जांच का उल्लेख है। कुछ मामलों में आर्थिक नुकसान की वसूली, वेतनवृद्धि रोकने और पेंशन में कटौती के आदेश दर्ज किए गए हैं।
हालांकि, 146 अधिकारी-कर्मचारियों का नाम जांच से जुड़े मामलों में सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि सभी दोषी साबित हुए हैं। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, कार्रवाई का स्वरूप प्रत्येक मामले के निष्कर्षों के आधार पर अलग-अलग है। इन मामलों ने नगरीय निकायों में खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता, सरकारी धन के उपयोग और जिम्मेदारी तय करने को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
बता दे की शासन की इस कारवाही से हड़कंप मचा हुआ है। तो वही नगरीय निकायों में सन्नाटा पसरा है। अब देखना ये है की अंधाधुंध बेलगाम और बेवजह खरीदी की आंच किस किस नगर निगम नगर पालिका और नगर पंचायतों तक पहुँचती है। और क्या इसके बाद पंचायतों का भी नम्बर आता है।





