
Nepal Flood 2026 नेपाल और तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक सूत्रों और नेपाल पुलिस से मिली ताज़ा जानकारी के अनुसार, इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 133 भारतीय नागरिकों समेत 750 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। तिब्बत की ओर से भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आई इस प्रलयंकारी बाढ़ ने दर्जनों गांवों को मलबे में तब्दील कर दिया है।
आपदा के बाद नेपाल सरकार ने आपातकालीन स्थिति घोषित करते हुए भारत और चीन दोनों देशों से त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए तकनीकी सहायता मांगी है।
तिब्बत में भूकंप और ग्लेशियर टूटने से शुरू हुआ प्रलय
अंतरराष्ट्रीय भूवैज्ञानिकों और मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस महाविनाश की शुरुआत तिब्बत क्षेत्र में आए 4.4 तीव्रता के भूकंप के बाद हुई। भूकंप के जोरदार झटकों के कारण तिब्बत के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित ग्लेशियर (हिमनद) का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया। इस मलबे और बर्फ ने ल्हेंदे नदी के प्राकृतिक प्रवाह को अस्थायी रूप से रोक दिया, जिससे एक विशाल कृत्रिम झील बन गई। पानी का दबाव बढ़ने पर यह प्राकृतिक बांध अचानक टूट गया और भोटे कोशी व त्रिशूली नदी में करीब 10 मीटर ऊंची पानी और कीचड़ की दीवार खौफनाक रफ्तार से नीचे की ओर दौड़ पड़ी।
133 भारतीय पर्यटक और तीर्थयात्री फंसे, राज्य सरकारें अलर्ट
लापताओं में भारत के विभिन्न राज्यों के तीर्थयात्री शामिल हैं जो कैलाश मानसरोवर की धार्मिक यात्रा पर निकले थे। रसुवागढ़ी स्थित इमिग्रेशन ऑफिस के पास जब यह बाढ़ आई, तब भारतीय नागरिक वहां मौजूद थे। पश्चिम बंगाल का एक 32 सदस्यीय दल पूरी तरह संपर्क से बाहर है, जिससे उनके परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने राज्य के नागरिकों की सुरक्षा और खोजबीन के लिए तत्काल राज्य आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए हैं। वहीं, नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में भी नदी तटों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
बुनियादी ढांचा पूरी तरह तबाह, एक दर्जन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स ठप
चीन और नेपाल के बीच व्यापार का मुख्य केंद्र माना जाने वाला केरुंग/जिरोंग पोर्ट और रसुवा जिला इस बाढ़ की चपेट में आकर पूरी तरह बर्बाद हो गया है। चीन और नेपाल को जोड़ने वाले कई महत्वपूर्ण कंक्रीट और सस्पेंशन ब्रिज ताश के पत्तों की तरह पानी में बह गए हैं, जिससे सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। नदियों के उफान और भारी कीचड़ के कारण नेपाल की एक दर्जन से अधिक प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं। इससे काठमांडू समेत कई बड़े शहरों में बिजली संकट मंडराने लगा है। बाढ़ की विभीषिका इतनी तीव्र थी कि नेपाल पुलिस और सशस्त्र बल के 28 जवान भी ड्यूटी के दौरान लापता हो गए हैं।
सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा
नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल के हेलीकॉप्टर्स प्रभावित क्षेत्रों में लगातार हवाई रेस्क्यू ऑपरेशन्स चला रहे हैं। मलबे और पहाड़ों से लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण जीवित बचे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। भारत की ओर से भी तत्काल चिकित्सा और राहत सामग्री की पहली खेप काठमांडू पहुंच चुकी है। मलबे के नीचे दबे मकानों और दुर्गम अंचलों की स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में मौतों का यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।





