भैंसदेही से तहसील ब्यूरो ललित छत्रपाल की रिपोर्ट
शासकीय आवास बना सागौन तस्करों का महफूज अड्डा,
वन विभाग के नजदीक ही बनाया तस्करों ने अपना ठिकाना,
विभागीय जिम्मेदारों को कानों कान नही खबर या है किसी का संरक्षण
भैंसदेही :-(sagwan taskari bhainsdehi) पुलिस द्वारा प्रेस नोट जारी कर अवगत कराया कि बीएमओ की सूचना पर भैंसदेही पुलिस और वन विभाग द्वारा संयुक्त कार्यवाही की गई , पुलिस के जारी किया प्रेस नोट, वन विभाग कर रहा मामले की जांच,मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की भैंसदेही में एक अजीबो-गरीब और चौकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ शातिर सागौन तस्करों ने एक खाली पड़े शासकीय भवन में सागौन के 23 नग चरपट छिपाकर रखे हुए थे।
किसकी है चर्पट कहाँ से आई
चरपटे किसकी है, कहा से और कब लाई गई थी , किस मंशा से लाई गई थी, जिसका खुलासा मामले की जांच के बाद ही हो पाएगा , दरअसल, मामला जिले के भैंसदेही थाना क्षेत्र और दक्षिण उप वन मंडल भैंसदेही क्षेत्र का है, जहां स्वास्थ्य विभाग के खाली पड़े आवास में छिपाकर रखी गई लाखों की सागौन की लकड़ी पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग के खाली पड़े क्वार्टर से 23 नग सागौन की चरपट बरामद की, जिसकी कीमत करीब 1 लाख रुपये बताई जा रही है।sagwan taskari bhainsdehi दरअसल जानकारी में सामने आ रहा है कि बीएमओ भैंसदेही ने पुलिस को लिखित सूचना दी थी कि स्वास्थ्य विभाग के एक रिक्त शासकीय आवास में इमारती लकड़ी रखे होने की जानकारी मिली है।
ए सी एफ भैंसदेही देवानंद पांडे
कारवाही भी सवालों के घेरे में
सूचना मिलते ही थाना भैंसदेही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और आवास की तलाशी ली। तस्दीक के दौरान पुलिस को सरकारी क्वार्टर के अंदर 23 नग सागौन की चरपट रखी बरामद हुई। जिसका पंचनामा बनाकर लकड़ी की जब्ती पुलिस ने मौके पर ही गवाहों की मौजूदगी में कर लि। बरामद लकड़ी को आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है। वन विभाग अब इस मामले में नियमानुसार जांच कर रहा है और पता लगा रहा है कि ये लकड़ी किसने और कब काटकर यहां छिपाई थी।
sagwan taskari bhainsdehi
खाली आवास बना तस्करी का अड्डा
बताया जा रहा है कि सरकारी आवास लंबे समय से खाली पड़ा था और इसी का फायदा उठाकर तस्करों ने उसे लकड़ी छिपाने का ठिकाना बना लिया था। अब आखिर इस पूरे मामले में किसकी सलिप्तता हो सकती है इस पहलू की भी जांच जारी है, आखिर किसके संरक्षण में और कब से चल रहा था ये तस्करी का खेल ये भी है एक बड़ा सवाल निकलकर सामने आ रहा है,आखिर पुलिस ने प्रेस नोट क्यों जारी किया.. ? ,
मामले पर मीडिया की नजर
वैसे तो पुलिस या वन विभाग छोटी से छोटी उपलब्धियों पर वाहवाही का डंका पीटने से गुरेज नहीं करता। तो इतनी बड़ी और लाखों की लावारिस सागौन की लकड़ियां मिलने पर पुलिस एवं वन विभाग का गुपचुप तरीके से कारवाही करना समझ से परे है. ……. आखिर क्यों ?
जब प्रेस नोट में संयुक्त टीम का हवाला दिया गया तो वन विभाग के कर्मचारियों के नाम क्यों नहीं जो कार्यवाही में शामिल थे, आखिर स्वास्थ्य विभाग को ही तस्करों ने निशाना क्यों बनाया, जब कार्यवाही संयुक्त टीम की है तो वन विभाग के लोडिंग वाहन का उपयोग क्यों नहीं किया गया, पुलिस को सूचना कितने बजे मिली , मौका स्थल पर पुलिस द्वारा कितने बजे छापा मारा गया, वन विभाग को आगे की कार्यवाही के लिए जब्त मॉल कितने बजे सौंपा गया , वह गवाह कौन है जिनके सामने पंचनामा बनाया गया, ऐसे बहुत से और भी सवाल है जिनके जवाब मिलना अभी बाकी है, पूरे मामले पर मीडिया की नजर बनी हुई है।




