
TET Maha Andolan नई दिल्ली/भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुरानी तिथि (बैक डेट) से लागू की जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के खिलाफ देशभर के शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा है। इसके विरोध में 30 अगस्त 2026 को देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल और ऐतिहासिक धरने का ऐलान किया गया है। इस देशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व नवनिर्मित अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा और विभिन्न राज्यों के प्रमुख शिक्षक संगठन कर रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि वे परीक्षा देने से नहीं डरते, लेकिन 25 से 30 साल की शासकीय सेवा दे चुके और उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके शिक्षकों की योग्यता पर सवाल उठाना उनके सम्मान पर सीधी चोट है।
आंदोलन के मुख्य बिंदु और शिक्षकों की मांगें:
- लोकसभा में अध्यादेश लाने की मांग: शिक्षक संगठनों की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार संसद (लोकसभा) में एक विशेष विधेयक या अध्यादेश लेकर आए, जिसके माध्यम से राइट टू एजुकेशन (RTE एक्ट, 2009) लागू होने से पहले नियुक्त हुए सभी नियमित शिक्षकों को इस परीक्षा की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।
- 25 लाख शिक्षकों के रोजगार पर संकट: सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के सभी वर्तमान शिक्षकों को भी 2 साल के भीतर TET परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है। ऐसा न करने पर उनकी नौकरी जाने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे देश भर के करीब 25 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
- अव्यावहारिक नियमों का विरोध: विरोध कर रहे शिक्षकों का तर्क है कि दुनिया का कोई भी नियम पूर्वव्यापी प्रभाव (retrospective effect) से लागू नहीं किया जाता। जो शिक्षक 50-55 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं, उनसे इस उम्र में प्रारंभिक पात्रता परीक्षा लेना पूरी तरह से अमानवीय और अव्यावहारिक है।
- शासकीय शिक्षक संगठन की एकजुटता: मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और मेघालय सहित देश के तमाम राज्यों के शिक्षक संघों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस लड़ाई में आपसी एकजुटता दिखाई है। मध्य प्रदेश के सभी जिलों से शिक्षकों की बड़ी टोलियां 29 अगस्त की रात को ही बसों और ट्रेनों के जरिए दिल्ली कूच के लिए रवाना होंगी।
देशभर में बैठकों का दौर जारी:
आंदोलन की तैयारियों को लेकर ब्लॉक और जिला स्तर पर लगातार बैठकें की जा रही हैं। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी सेवा सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो इस बार का दिल्ली कूच आर-पार का आंदोलन साबित होगा।






