
Automatic Number Plate Recognition सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन बीमा को लेकर एक ऐतिहासिक और जनहितकारी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि भारत की सड़कों पर 56 प्रतिशत से ज्यादा वाहन बिना तीसरे पक्ष के बीमा (थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस) के चल रहे हैं। इससे दुर्घटना के शिकार परिवारों को मुआवजा मिलने में भारी देरी होती है और वे लंबी अदालती लड़ाई में फंस जाते हैं।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने इस मुद्दे को अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) से जोड़ा और सरकार व संबंधित एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए।
### कोर्ट ने क्या-क्या निर्देश दिए?
1. *तकनीक से होगी निगरानी*
सड़कों पर लगे ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों को वाहन पोर्टल (VAHAN) और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) से जोड़ा जाएगा। बिना बीमा वाले वाहनों पर अपने-आप ई-चालान कटेगा। पुलिस को भी हैंडहेल्ड डिजिटल डिवाइस दिए जाएंगे ताकि वे मौके पर ही जांच कर सकें।
2. *नए वाहनों का बीमा अब ज्यादा सालों का*
नई कारों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा अब 3 साल के बजाय 4 साल का होगा। नई दोपहिया गाड़ियों के लिए यह 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दिया गया है।
3. *बीमा पॉलिसी अब चार परतों में साफ-साफ*
– अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा
– यात्रियों के लिए कानूनी देनदारी का वैकल्पिक कवर
– मालिक/ड्राइवर/यात्रियों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना कवर (वैकल्पिक)
– खुद की गाड़ी के नुकसान का कवर (वैकल्पिक)
बीमा खरीदने से पहले ग्राहक को साफ-सुथरी जानकारी वाली शीट और विकल्प फॉर्म जरूर दिया जाएगा।
4. *पेट्रोल पंप और टोल पर भी जांच*
पायलट प्रोजेक्ट में पेट्रोल पंप पर बिना बीमा वाली गाड़ी को ईंधन नहीं मिलेगा। चुनिंदा राजमार्गों पर बिना बैरियर वाले टोल सिस्टम (मल्टी-लेन फ्री फ्लो) शुरू किए जाएंगे, जिससे जाम और दुर्घटनाएं दोनों कम होंगी।
5. *पुराने मामलों में तेजी*
31 मार्च 2022 से पहले के दुर्घटना मामलों में पुलिस को विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (DAR) और जरूरी दस्तावेज जल्द से जल्द अदालत में जमा करने होंगे।
### इस मामले में क्या हुआ?
राष्ट्रीय बीमा कंपनी ने एक मुआवजा मामले में अपील की थी। हाई कोर्ट ने पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए कहा कि कॉम्प्रिहेंसिव/पैकेज पॉलिसी में गाड़ी में बैठे यात्रियों का भी कवर होता है। कोर्ट ने बीमा कंपनियों को “बहुत तकनीकी” रवैया अपनाने से मना किया।
### आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला?
– सड़क दुर्घटना में घायल या मृत व्यक्ति के परिवार को जल्दी मुआवजा मिलेगा।
– बिना बीमा वाली गाड़ियों की संख्या घटेगी।
– बीमा खरीदते समय ग्राहक को साफ जानकारी मिलेगी।
– पुलिस और तकनीक के जरिए कानून का पालन सख्ती से होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सुरक्षित यात्रा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। यह फैसला सिर्फ एक केस का नहीं, बल्कि पूरे देश की सड़क सुरक्षा और बीमा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम है।
*स्रोत:* सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, सिविल अपील संख्या 14369/2025 — नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम श्रीमती थुंगला धना लक्ष्मी एवं अन्य (4 अगस्त 2026)






