
शासकीय विद्यालयों में सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए हर जरूरत की पूर्ति केवल सरकारी संसाधनों से ही क्यों हो? यदि समाज अपने आसपास के स्कूलों को अपना विद्यालय समझकर उनके विकास में सहभागी बने, तो न केवल हजारों बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है बल्कि समाज के जुड़ाव से स्कूलों का बेहतर प्रबंधन हो सकता है। इसी सोच ने बैतूल में “शिक्षा संजीवनी अधोसंरचना विकास अभियान” की नींव रखी। प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बैतूल श्री हेमन्त खंडेलवाल की इस सोच को कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने जनभागीदारी की विस्तृत कार्ययोजना का स्वरूप दिया और अब यह अभियान समाज, सरकार, जनप्रतिनिधियों, संस्थाओं और नागरिकों की सामूहिक सहभागिता से ‘बैतूल मॉडल’ के रूप में आकार ले रहा है।

इसी अभियान की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजना की समीक्षा के लिए गुरुवार को कलेक्ट्रेट में बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधायक आमला डॉ. योगेश पंडाग्रे, विधायक भैंसदेही श्री महेन्द्र सिंह चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजा पवार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री हंसराज धुर्वे , कलेक्टर डॉ सौरभ संजय सोनवणे सहित विभिन्न बैंकिंग संस्थाओं के प्रतिनिधि, सामाजिक एवं व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधि, नागरिक, निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदार तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभियान के तहत अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में 2284 शासकीय विद्यालयों का चिन्हांकन किया गया है। प्रथम चरण में 415 विद्यालयों में अधोसंरचना विकास के कार्य प्रारंभ किए जा रहे हैं तथा आगे चरणबद्ध रूप से 500-500 विद्यालयों को विकास कार्यों से जोड़ा जाएगा। चिन्हित प्रत्येक स्कूलों के विकास के लिए अनुमानित 5 से 7 लाख की राशि प्रस्तावित की गई। अभियान के तहत विद्यालयों की आवश्यकता के अनुसार पेयजल, शौचालय, छत एवं भवन मरम्मत, फर्नीचर, विद्युतीकरण, पंखे-लाइट, बाउंड्रीवाल, अतिरिक्त कक्ष और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। प्रथम चरण में हर ब्लॉकों में चिन्हित 415 स्कूलों में लगभग 18 से 20 करोड़ की लागत से कार्य प्रारंभ होंगे।

शिक्षक दिवस 5 सितम्बर 2026 से चयनित विद्यालयों में अधोसंरचना विकास कार्यों का शुभारंभ किया जाएगा। इस अवसर पर अभियान में सहयोग करने वाले जनप्रतिनिधियों, संस्थाओं एवं नागरिकों को सम्मानित किया जाएगा तथा विद्यालयों में उनके योगदान को दर्शाने वाले डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे। 5 सितम्बर से प्रत्येक सप्ताह लगभग 100 विद्यालयों में विकास कार्य प्रारंभ किए जाएंगे और इन्हें नवम्बर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
विधायक श्री हेमन्त खंडेलवाल ने कहा कि “शिक्षा संजीवनी” केवल स्कूलों की अधोसंरचना सुधारने का अभियान नहीं है, बल्कि समाज को विद्यालयों से जोड़ने की एक पहल है। जब समाज सरकार के साथ मिलकर जनहित के कार्यों में सहभागी बनता है, तो बदलाव अधिक व्यापक और स्थायी होता है। सहयोग करने वाला व्यक्ति या संस्था केवल संसाधन उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि उस विद्यालय के विकास और नियमित देखरेख को लेकर अपनी जिम्मेदारी भी महसूस करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संजीवनी के इस प्रयास की प्रदेश स्तर पर भी सराहना हुई है। यह मॉडल इस बात का उदाहरण है कि सरकार की योजनाओं और समाज की इच्छाशक्ति को एक साथ जोड़ दिया जाए तो विकास की गति कई गुना बढ़ सकती है।

अभियान के प्रथम चरण में विभिन्न विभागों, एजेंसियों एवं सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता से अभी तक 271 विद्यालयों में अधोसंरचना विकास कार्यों का आवंटन किया जा चुका है। खनिज विभाग, स्कूल एवं उच्च शिक्षा, राजस्व, पुलिस एवं आबकारी, लोक निर्माण, उद्योग, कृषि, वन, पंचायत एवं नगरीय निकाय, बैंकिंग संस्थाओं तथा जनजातीय कार्य विभाग सहित विभिन्न संस्थाएं विद्यालयों के विकास में सहभागी बन रही हैं। अभियान के प्रति समाज के विभिन्न वर्गों में भी उत्साह दिखाई दे रहा है। अब तक 600 से अधिक नागरिकों ने रजिस्ट्रेशन लिंक के माध्यम से सहयोग के लिए अपनी सहमति व्यक्त की है। उर्वरक विक्रेता संघ ने 10 विद्यालयों तथा शुगर मिल ने 5 विद्यालयों के विकास में सहयोग की सहमति दी है। विभिन्न बैंकिंग संस्थाओं, अस्पताल संचालकों, ठेकेदारों, सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों ने भी विद्यालयों को गोद लेकर विकास में सहयोग करने की इच्छा जताई है। जिले के शिक्षा संघों ने 9000 से अधिक डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने का लिखित संकल्प दिया है। विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, कलेक्टर, अपर कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों ने भी डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने के लिए आगे आएं हैं।






