
trupti farji ias भोपाल/अशोकनगर: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और अशोकनगर के चंदेरी क्षेत्र में रसूखदार आईएएस (IAS) अफसर और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के फर्जी कार्ड का मुखौटा पहनकर प्रदेशभर के भोले-भाले और बेरोजगार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली तृप्ति राजपूत और उसके सगे भाई सुधांशु सिंह के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई बेहद तेज हो गई है। अशोकनगर की चंदेरी थाना पुलिस दोनों शातिर आरोपियों को कोर्ट से कड़ी कानूनी रिमांड पर लेने के बाद, ठगी के गहरे नेक्सस की जांच करने और सबूत जुटाने के लिए भोपाल पहुंची है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही इन दोनों महाठगों के भोपाल आने और रिमांड पर होने की खबर सार्वजनिक हुई, राजधानी सहित अन्य जिलों से भी ठगी के शिकार हुए कई पीड़ित सामने आने लगे हैं, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
काल्पनिक रसूख और फर्जी रुतबे का फैलाया था चक्रव्यूह
चंदेरी पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक और अब तक की पूछताछ में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी तृप्ति राजपूत (निवासी बागमुगलिया, भोपाल) ने लंबे समय से समाज और सोशल मीडिया पर अपनी कई नकली और रसूखदार प्रशासनिक पहचान बना रखी थी। वह कभी खुद को अलग-अलग सरकारी मंत्रालयों में मानव संसाधन विभाग (HR Department) की हेड बताती थी, तो कभी मध्य प्रदेश टूरिज्म विभाग में एडिशनल डायरेक्टर होने का ढोंग रचती थी। इस पूरे सुनियोजित फर्जीवाड़े और चक्रव्यूह को और अधिक गहरा तथा विश्वसनीय दिखाने के लिए उसका सगा भाई सुधांशु सिंह हमेशा उसके साथ किसी सुरक्षाकर्मी या निजी सचिव की तरह साए की तरह तैनात रहता था।
यह शातिर भाई-बहन की जोड़ी किसी भी नए शहर में जाने के बाद वहां के सबसे आलीशान और महंगे लग्जरी होटलों में रुकती थी। महंगे आईफोन का खुलेआम प्रदर्शन करना, ब्रांडेड कपड़े पहनना और किराए पर ली गई चमचमाती इनोवा गाड़ी पर अवैध रूप से ‘भारत सरकार’ (Government of India) की नेमप्लेट लगाकर घूमना, इनकी रोजमर्रा की आदत थी। इसी बनावटी दिखावे और प्रशासनिक धौंस के कारण आम लोग और बेरोजगार युवा इन्हें सचमुच का बड़ा अधिकारी समझ बैठते थे। इसी जाल में फंसकर चंदेरी के मशहूर किला कोठी (हेरिटेज होटल) के स्टाफ, स्थानीय टूरिस्ट गाइड और क्षेत्र के कई अन्य युवाओं ने सरकारी नौकरी पाने की लालसा में अपनी गाढ़ी कमाई के कुल 9 लाख 80 हजार रुपये इन ठगों के हवाले कर दिए थे।
ससुराल और मायके में बैक-टू-बैक छापेमारी, मिले नकली CBI कार्ड
चंदेरी पुलिस की टीम जब आरोपियों को लेकर भोपाल पहुंची, तो स्थानीय पुलिस के सहयोग से तृप्ति राजपूत के बागमुगालिया स्थित मायके और अलकापुरी स्थित ससुराल में एक साथ बैक-टू-बैक छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। घंटों चली इस गहन तलाशी के दौरान पुलिस के हाथ जो सबूत लगे हैं, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। आरोपियों के ठिकानों से भारी मात्रा में फर्जी सरकारी दस्तावेज, जाली नियुक्त पत्र, भारत सरकार और सीबीआई (CBI) के फर्जी पहचान पत्र, मंत्रालयों के जाली लेटरहेड और यहाँ तक कि किसी वास्तविक प्रशासनिक अधिकारी की तर्ज पर खुद के नाम से बनवाए गए फर्जी स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) भी बरामद हुए हैं। पुलिस ने इन सभी संदिग्ध सामग्रियों को जब्त करने के साथ ही ठगी की रकम से इस्तेमाल की जा रही लग्जरी गाड़ियों और बैंक खातों को भी फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
भोपाल पहुंचते ही पीड़ितों की लगी कतार, करोड़ों के घोटाले की आशंका
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तृप्ति और सुधांशु की गिरफ्तारी और भोपाल रिमांड की खबर जैसे ही स्थानीय समाचार माध्यमों में फैली, वैसे ही बागमुगलिया और अवधपुरी थाने के आसपास ठगी के शिकार हुए कई और परेशान युवा चंदेरी पुलिस टीम से संपर्क करने पहुंच गए। नए पीड़ितों ने लिखित और मौखिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई है कि इस भाई-बहन की जोड़ी ने उन्हें भी राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में क्लर्क, सहायक और अन्य राजपत्रित पदों पर बिना परीक्षा के सीधी बैकडोर एंट्री (Direct Recruitment) दिलाने का झांसा दिया था और इसके एवज में प्रत्येक छात्र से 3 से 5 लाख रुपये ऐंठे थे।
नए पीड़ितों के सामने आने के बाद अब पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस व्यापक ठगी नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है। पुलिस का अनुमान है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, ठगी का यह कुल आंकड़ा करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।
सचिवालय और मंत्रालयों के मददगारों पर भी पुलिस की पैनी नजर
चंदेरी पुलिस अब आरोपियों के जब्त किए गए मोबाइल फोनों की कॉल डिटेल्स (CDR), व्हाट्सएप चैट्स और बैंक ट्रांजैक्शंस को बहुत बारीकी से खंगाल रही है। पुलिस को संदेह है कि भोपाल के वल्लभ भवन (सचिवालय) या अन्य सरकारी दफ्तरों के कुछ निचले स्तर के कर्मचारी या बिचौलिए भी तृप्ति राजपूत के इस फर्जी साम्राज्य को चलाने में उसकी परोक्ष या अपरोक्ष रूप से मदद कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ जारी रहेगी और इस रैकेट में शामिल किसी भी अन्य मददगार या सह-आरोपी को बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा।






