
ganesh ji ki ankho se nikle aansu मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन के ग्रामीण इलाके से बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. उज्जैन जिले की ताजपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले माता जी के चोपड़ा (बावड़ी) गांव में स्थित एक प्राचीन गणेश मंदिर में स्थापित प्रतिमा की आंखों से पानी (आंसू जैसा तरल पदार्थ) निकलने का दावा किया जा रहा है.
गणेश चतुर्थी के त्योहार से ठीक पहले सामने आई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखने के बाद आसपास के इलाकों से सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर की तरफ दौड़ पड़े हैं.
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8 घंटे तक लगातार बहती रहीं बूंदें
स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक, यह सिलसिला शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुआ और लगभग 8 घंटे तक लगातार चलता रहा. जैसे ही गांव में यह बात फैली कि भगवान गणेश की प्रतिमा से आंसू आ रहे हैं, लोग अपनी दुकानों और खेतों के काम छोड़कर मंदिर में जमा हो गए. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि प्रतिमा की आंखों के कोने से पानी की बूंदें लगातार छलक कर नीचे गिर रही थीं.
परंपरा में चूक या भगवान की नाराजगी? ganesh ji ki ankho se nikle aansu
इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी शनिवार सुबह गांव में नगर पूजा का आयोजन किया गया था. परंपरा के अनुसार, इस मौके पर पंचायत और ग्रामीणों की तरफ से भगवान गणेश को सिंदूर और घी से बना पारंपरिक ‘चोला’ चढ़ाया जाना था, लेकिन किसी कारणवश सुबह चोला नहीं चढ़ाया जा सका.
ganesh ji ki ankho se nikle aansu ग्रामीणों का दृढ़ विश्वास है कि इसी पारंपरिक चूक के कारण भगवान गणेश नाराज हो गए और उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे. इस घटना से सहमे और भावुक हुए ग्रामीणों ने तुरंत मंदिर में ढोल-धमाकों के साथ विशेष महाआरती शुरू की, भगवान से क्षमा-याचना की और विधि-विधान से चोला चढ़ाया. दावा किया जा रहा है कि इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद आंखों से पानी आना धीरे-धीरे बंद हो गया.
वैज्ञानिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण
एक तरफ जहां श्रद्धालु इसे साक्षात चमत्कार मानकर पूजा-अर्चना में लीन हैं, वहीं दूसरी तरफ वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले जानकारों का कहना है कि मूर्तियों से पानी या नमी के रिसाव के पीछे प्राकृतिक कारण होते हैं. हवा में मौजूद अत्यधिक आर्द्रता (Humidity), मौसम में बदलाव की वजह से पत्थरों पर होने वाला कंडेनसेशन (नमी जमना), या बरसों से चढ़ाई जा रही चोले की परतों और पाषाण के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण पत्थर के अंदर की नमी बूंदों के रूप में बाहर आ जाती है.
ganesh ji ki ankho se nikle aansu भीड़ की स्थिति को देखते हुए स्थानीय सरपंच और मंदिर प्रशासन द्वारा क्षेत्रीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस घटना की सूचना दे दी गई है ताकि मंदिर परिसर में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनी रहे. फिलहाल यह पूरा मामला वैज्ञानिक जांच से दूर आम जनता की अगाध आस्था और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है.
घटना से जुड़ी मुख्य बातें:
दावा: स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का दावा है कि मंदिर में स्थापित प्राचीन गणेश प्रतिमा की आंखों से लगातार आंसू (तरल पदार्थ) बह रहे थे।
यह रहस्यमयी सिलसिला करीब 8 घंटे तक चलता रहा। मान्यता और चर्चा: लोगों का मानना है कि पंचायत द्वारा गणेश जी को चोला न चढ़ाने के कारण भगवान नाराज हो गए थे। इसे किसी अनहोनी या संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
भीड़ और अनुष्ठान:
वीडियो वायरल होने के बाद दर्शन के लिए भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। ग्रामीणों ने भगवान की नाराजगी दूर करने के लिए विशेष महाआरती और क्षमा-याचना भी की।






