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आजाद हिंद फौज के राधाकृष्ण सिंह पंचतत्व में हुए विलीन

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ब्यूरो रिपोर्ट

आजाद हिंद फौज के राधाकृष्ण सिंह पंचतत्व में हुए विलीन। राजकीय सम्मान के साथ दी नम आंखों से दी अंतिम बिदाई।
सारनी। आजाद हिंद फौज के सिपाही राधा कृष्ण सिंह शास्त्री का कल पहाड़पुर में निधन हुआ था।भारत को आजादी दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही ,बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के पहाड़पुर गांव में 105 साल की उम्र में 24 नवम्बर को अंतिम सांस ली। शास्त्री जी के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। राधाकृष्ण सिंह शास्त्री जी का जन्म 01जनवरी 1920 को बर्मा (म्यांमार) ब्रम्हदेश के चौतगा में हुआ था। राधाकृष्ण सिंह शास्त्री के 30 वर्षों से सहयोगी रहे अंबादास सूने ने बताया कि शास्त्री जी के साथ आजाद हिंद फौज के अंतिम सिपाही के निधन से एक युग समाप्त हुआ। शास्त्री जी ने अक्टूबर 1943 में आजादी के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आव्हान पर आजाद हिंद फौज में भर्ती होकर भारत को स्वतंत्र कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश के अधिकांश भारत वासी दक्षिण पूर्व एशियाई देशो में थे। शास्त्री जी हिन्दी, भोजपुरी के साथ तमिल भाषा भी बोलते थे। उल्लेखनीय है कि उनकी पत्नी तमिल भाषी थी।

आजाद हिंद फौज की स्थापना रासबिहारी बोस ने की और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को उसकी बाग डोर सौंपी।नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने नारा देते हुए कहा कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा। देश के बाहर रहते हुए नेताजी ने स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में अतुलनीय योगदान दिया। सरकार ने पुनर्वास के तहत 5 एकड कृषियोग्य भूमि दी थी। केंद्रीय और राज्य शासन की पेंशन से परिवार के साथ अपना गुजर बसर कर रहे थे। स्व राधाकृष्ण सिंह शास्त्री अपने पीछे दो बेटे भरा पूरा परिवार छोड़कर अंतिम सांस ली। शास्त्री जी का आज 25 नवम्बर 25 को पहाड़पुर गांव के मोक्षधाम में अंतिम संस्कार किया गया। जहां क्षेत्र के विधायक गंगा सज्जन सिंह उइके , राजेन्द्र मालवीय, डाक्टर सहदेव राय, नगर पालिका परिषद सारनी के अध्यक्ष किशोर बरदे, कान्हा वाडी से नरेंद्र उइके , आमढाना से राधेश्याम उइके, चोपना से अमितदास, भारतीय मजदूर संघ से हरिओम कुशवाहा के साथ आस पास के सैकडों नागरिक उपस्थित हुए। इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर, अपर कलेक्टर,एडिशनल एस पी , तहसीलदार, और सशस्त्र पुलिस के जवान भी उपस्थित सहे।