
वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सेन
ब्रिटिश काल के पुराने कानून: राष्ट्र हित में निरस्त करने की आवश्यकता, विस्तृत उदाहरण कारणों सहित, अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की राय और राष्ट्र को होने वाला नुकसान
भारत में ब्रिटिश काल के कई कानून आज भी प्रभावी हैं, जो मूल रूप से औपनिवेशिक शासन को मजबूत करने और भारतीयों को दबाने के लिए बनाए गए थे। केंद्र सरकार ने 2014 से अब तक लगभग 1,500 ऐसे कानूनों को निरस्त किया है, जिसमें हाल ही में भारतीय दंड संहिता (IPC, 1860), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC, 1898) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (1872) को नए कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—से बदल दिया गया। हालांकि, अभी भी 222 से अधिक ऐसे कानून बाकी हैं, जिन्हें 2025 में निरस्त करने की मांग है। ये कानून अप्रासंगिक, दमनकारी और आधुनिक भारत की जरूरतों से मेल नहीं खाते। लॉ कमीशन ऑफ इंडिया ने 1957, 1984, 1993 और 1998 में इनके निरस्त करने की सिफारिश की थी। अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, जो सुप्रीम कोर्ट में कई PIL दाखिल कर चुके हैं, इन कानूनों को “ब्रिटिशर्स द्वारा, ब्रिटिशर्स के लिए” बताते हैं और इन्हें हटाने की जोरदार वकालत करते हैं। नीचे विस्तृत उदाहरण दिए गए हैं, जिसमें प्रत्येक कानून का इतिहास, कारण, प्रभाव और उपाध्याय की राय शामिल है।
#### ब्रिटिश काल के प्रमुख कानून जो निरस्त किए जाने की आवश्यकता है (विस्तृत उदाहरण कारणों सहित)
ये कानून मुख्य रूप से दमन, आर्थिक शोषण और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए बनाए गए थे। यहां कुछ प्रमुख उदाहरणों को विस्तार से समझाया गया है:
1. *इंडियन पुलिस एक्ट, 1861*:
– *इतिहास और पृष्ठभूमि*: 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीय पुलिस को एक दमनकारी तंत्र के रूप में स्थापित करने के लिए यह कानून बनाया। लॉर्ड मैकॉले की सिफारिश पर आधारित, यह पुलिस को ब्रिटिश हितों की रक्षा करने वाला बनाता था, न कि नागरिकों की सेवा करने वाला।
– *निरस्त करने के कारण*: यह कानून पुलिस को राजनीतिक दखलंदाजी से मुक्त नहीं रखता, जवाबदेही की कमी है, और पुलिस को “मास्टर” की तरह व्यवहार करने की अनुमति देता है। आधुनिक पुलिसिंग (जैसे कम्युनिटी पुलिसिंग, ट्रांसपेरेंसी) से मेल नहीं खाता। दुरुपयोग से पुलिस अत्याचार बढ़ते हैं।
– *राष्ट्र को होने वाला नुकसान*: पुलिस की स्वतंत्रता न होने से भ्रष्टाचार और अपराध नियंत्रण में कमी आती है। लाखों केस पेंडिंग रहते हैं, जिससे न्याय में देरी होती है। उदाहरण: पुलिस द्वारा फर्जी एनकाउंटर या असहमति दबाने के मामले बढ़ते हैं, जो लोकतंत्र को कमजोर करते हैं।
2. *फॉरेनर्स एक्ट, 1946*:
– *इतिहास और पृष्ठभूमि*: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने विदेशियों पर नियंत्रण के लिए यह कानून बनाया, जो मुख्य रूप से गैर-ब्रिटिश व्यक्तियों को निगरानी में रखता था। आजादी के बाद भी इसे बरकरार रखा गया।
– *निरस्त करने के कारण*: यह प्रवासियों के अधिकारों को सीमित करता है और आधुनिक इमिग्रेशन पॉलिसी (जैसे CAA-NRC से जुड़े) से संघर्ष करता है। मानवाधिकार उल्लंघन को बढ़ावा देता है, जैसे मनमानी डिटेंशन।
– *राष्ट्र को होने वाला नुकसान*: बॉर्डर मैनेजमेंट में असंगतियां आती हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित होती है। शरणार्थियों के साथ अन्याय होता है, जो अंतरराष्ट्रीय छवि खराब करता है। उदाहरण: रोहिंग्या जैसे मामलों में विवाद बढ़ते हैं।
3. *इंडियन पोस्ट ऑफिस एक्ट, 1898*:
– *इतिहास और पृष्ठभूमि*: ब्रिटिश सरकार ने डाक व्यवस्था को नियंत्रित करने और गोपनीय जानकारी पर नजर रखने के लिए यह कानून बनाया। यह उस समय की सेंसरशिप का हिस्सा था।
– *निरस्त करने के कारण*: यह गोपनीयता को प्रभावित करता है और डिजिटल युग (जैसे डेटा प्रोटेक्शन बिल) से मेल नहीं खाता। संचार की स्वतंत्रता को बाधित करता है।
– *राष्ट्र को होने वाला नुकसान*: प्राइवेसी उल्लंघन से नागरिकों का विश्वास कम होता है। डिजिटल अर्थव्यवस्था में बाधा, जैसे ई-कॉमर्स और ऑनलाइन संचार प्रभावित। उदाहरण: सरकारी सेंसरशिप के मामले बढ़ते हैं।
4. *बंगाल इंडिगो कॉन्ट्रैक्ट्स एक्ट, 1836*:
– *इतिहास और पृष्ठभूमि*: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने नील की खेती को बढ़ावा देने और किसानों का शोषण करने के लिए यह कानून बनाया। इससे किसानों को जबरन अनुबंध में बांधा जाता था।
– *निरस्त करने के कारण*: आज अप्रासंगिक है, क्योंकि नील की खेती नहीं होती। कानूनी सिस्टम में जटिलता बढ़ाता है और आधुनिक कृषि कानूनों से संघर्ष करता है।
– *राष्ट्र को होने वाला नुकसान*: किसानों के अधिकार प्रभावित होते हैं, और पुराने कानूनों से न्यायिक बोझ बढ़ता है। उदाहरण: भूमि विवादों में देरी।
5. *फॉरेन रिक्रूटिंग एक्ट, 1874*:
– *इतिहास और पृष्ठभूमि*: ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को विदेशी सेनाओं में भर्ती होने से रोकने के लिए बनाया, ताकि वे ब्रिटिश सेना के खिलाफ न लड़ें।
– *निरस्त करने के कारण*: वैश्विक अवसरों में बाधा डालता है। आधुनिक समय में अप्रासंगिक, क्योंकि भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग करता है।
– *राष्ट्र को होने वाला नुकसान*: युवाओं के रोजगार अवसर सीमित, जिससे आर्थिक विकास प्रभावित। उदाहरण: प्रवासी भारतीयों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं।
6. *कोस्टिंग वेसल्स एक्ट, 1838*:
– *इतिहास और पृष्ठभूमि*: तटीय जहाजों पर नियंत्रण के लिए बनाया गया, ब्रिटिश व्यापार हितों की रक्षा के लिए।
– *निरस्त करने के कारण*: आधुनिक शिपिंग कानूनों (जैसे मेजर पोर्ट अथॉरिटी एक्ट) से मेल नहीं खाता।
– *राष्ट्र को होने वाला नुकसान*: समुद्री व्यापार में बाधा, आर्थिक गतिविधियां प्रभावित। उदाहरण: पोर्ट विकास में देरी।
7. *ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923*:
– *इतिहास और पृष्ठभूमि*: ब्रिटिश सरकार ने गोपनीय जानकारी लीक रोकने के लिए बनाया, लेकिन असहमति दबाने के लिए इस्तेमाल किया।
– *निरस्त करने के कारण*: सेक्शन 5 में “राज्य हित के विरुद्ध संचार” को अपराध बनाता है, जो RTI से संघर्ष करता है।
– *राष्ट्र को होने वाला नुकसान*: पारदर्शिता कम, भ्रष्टाचार बढ़ता है। उदाहरण: पत्रकारों पर दुरुपयोग।
अन्य उदाहरण: सेक्शन 377 (समलैंगिकता को अपराध बनाता था, 2018 में निरस्त), सेडिशन लॉ (धारा 124A, जो अब नए रूप में है लेकिन दमनकारी था)।
#### अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की राय (विस्तार से)
अश्विनी उपाध्याय (@AshwiniUpadhyay) ने कई X पोस्ट्स और PIL में इन कानूनों को हटाने की मांग की है। वे कहते हैं: “हमारे पास ब्रिटिशर्स द्वारा, ब्रिटिशर्स के लिए बनाए गए कॉलोनियल कानूनों की जरूरत नहीं है। हमें अपने खुद के कानून चाहिए।” उन्होंने 2025 में 222 कानूनों को निरस्त करने की अपील की, जिसमें पुलिस एक्ट, पोस्ट ऑफिस एक्ट आदि शामिल हैं। उपाध्याय “वन नेशन वन पीनल कोड” और “वन नेशन वन पुलिस कोड” की वकालत करते हैं, ताकि पुलिस स्वतंत्र हो और फर्जी केस कम हों। वे कहते हैं कि ये कानून भ्रष्टाचार, अपराध, जातिवाद आदि की जड़ हैं, और इन्हें हटाकर “न्याय एक वर्ष में” सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने “अंग्रेजी कानून हटाओ” अभियान चलाया और पुलिस, ज्यूडिशियल, एडमिनिस्ट्रेटिव और सिटीजन चार्टर लागू करने की मांग की। हाल के भाषण में उन्होंने अमेरिका, सिंगापुर आदि से बेस्ट प्रैक्टिस अपनाने की बात की।
#### राष्ट्र को होने वाला नुकसान (विस्तार से)
– *न्याय व्यवस्था में देरी*: पुराने कानूनों से 5 करोड़ से अधिक केस पेंडिंग, जिससे न्याय में 20-30 साल लगते हैं। भ्रष्टाचार और अपराध बढ़ते हैं।
– *राष्ट्रीय एकता प्रभावित*: दमनकारी कानून (जैसे सेडिशन) असहमति दबाते हैं, जो लोकतंत्र कमजोर करता है।
– *आर्थिक विकास में बाधा*: अप्रासंगिक कानून व्यापार, निवेश और रोजगार सीमित करते हैं।
– *मानवाधिकार उल्लंघन*: पुलिस अत्याचार और प्राइवेसी ब्रेक से नागरिक स्वतंत्रताएं प्रभावित।
– *सामाजिक असंतुलन*: ये कानून भारतीय संस्कृति को कमजोर करते हैं, जातिवाद-क्षेत्रवाद बढ़ाते हैं।
#### निष्कर्ष
ये कानून भारत की संप्रभुता को बाधित करते हैं। उपाध्याय की मांग है कि इन्हें जल्द निरस्त कर आधुनिक कानून बनाएं। हाल के बदलाव सकारात्मक हैं, लेकिन पूर्ण सुधार जरूरी है।




