
वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सेन
#### परिचय
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां भूमि न केवल आर्थिक संसाधन है, बल्कि सामाजिक न्याय और विकास का आधार भी। स्वतंत्रता के बाद से भूमि सुधार एक महत्वपूर्ण नीति रही है, जिसका उद्देश्य भूमिहीनों को भूमि वितरित करना, किरायेदारी को नियंत्रित करना और भूमि असमानता को कम करना था। हाल ही में, राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने बजट चर्चा में भूमि रिकॉर्ड्स की अव्यवस्था पर प्रकाश डाला और एक राष्ट्रीय ब्लॉकचेन आधारित प्रॉपर्टी रजिस्ट्री की वकालत की। यह लेख भारत सरकार और आम जनता को भूमि सुधारों की जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। हम चर्चा करेंगे कि भूमि सुधारों को तकनीकी रूप से कैसे मजबूत किया जा सकता है, अदालतों में भूमि विवादों को कैसे कम किया जाए, ब्लॉकचेन प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का विस्तार क्या है, अन्य प्रमुख योजनाएं क्या हैं, और इनसे आम नागरिकों को कैसे लाभ होगा।
#### भूमि सुधारों को तकनीकी रूप से मजबूत करने के उपाय
भारत में भूमि सुधारों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं, जो पारदर्शिता, दक्षता और पहुंच बढ़ाएंगे। सबसे पहले, भूमि रिकॉर्ड्स का पूर्ण डिजिटाइजेशन आवश्यक है। डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के तहत, भूमि रिकॉर्ड्स को डिजिटल फॉर्मेट में बदलना, जीपीएस मैपिंग और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करना चाहिए। इससे भूमि की सटीक माप और स्वामित्व सत्यापन आसान होगा।
दूसरा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन टेक्नोलॉजी का एकीकरण। ड्रोन्स से भूमि सर्वेक्षण तेजी से किया जा सकता है, जो SVAMITVA योजना में पहले से उपयोग हो रहा है। AI से विवादों की पूर्वानुमान और स्वचालित समाधान संभव है, जैसे कि भूमि उपयोग की योजना बनाना।
तीसरा, ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग, जो रिकॉर्ड्स को छेड़छाड़-प्रूफ बनाएगी। यह समय-चिह्नित और वितरित लेजर सिस्टम है, जो स्वीडन और UAE जैसे देशों में सफल रहा है। भारत में, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य पहले से ब्लॉकचेन का पायलट कर रहे हैं।
चौथा, मोबाइल ऐप्स और ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म्स का विकास। नागरिकों को ऑनलाइन रिकॉर्ड एक्सेस, म्यूटेशन और ट्रांसफर की सुविधा मिलनी चाहिए, जो भ्रष्टाचार कम करेगी। अंत में, राज्य और केंद्र सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाना, जैसे कि e-Court और भूमि रिकॉर्ड्स का लिंकेज। ये उपाय न केवल उत्पादकता बढ़ाएंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।
#### न्यायालय में भूमि संबंधित मामलों में कमी लाने के तरीके
भारत में 66% सिविल मुकदमे भूमि विवादों से संबंधित हैं, जो न्यायिक बोझ बढ़ाते हैं। इनकी कमी के लिए पहला कदम रिकॉर्ड्स की पारदर्शिता है। डिजिटल रिकॉर्ड्स से टाइटल विवाद कम होंगे, क्योंकि सत्यापन त्वरित होगा।
दूसरा, वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) को बढ़ावा। मध्यस्थता, आर्बिट्रेशन और लोक अदालतों से 80% विवादों का निपटारा कोर्ट के बाहर हो सकता है। कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर की धारा 89 ADR को प्रोत्साहित करती है।
तीसरा, कानूनी सुधार। पुराने कानूनों को अपडेट करें, जैसे कि भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन। सुप्रीम कोर्ट ने भी ब्लॉकचेन को सुझाया है, जो फर्जी दस्तावेज कम करेगा।
चौथा, प्रशासनिक क्षमता बढ़ाना। रेवेन्यू अधिकारियों को ट्रेनिंग दें और e-Court सिस्टम को भूमि डेटाबेस से लिंक करें। अंत में, जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि नागरिक दस्तावेजों की जांच पहले करें। इससे अदालती मामलों में 30-40% कमी आ सकती है।
#### ब्लॉकचेन प्रॉपर्टी रजिस्ट्री का विस्तार
ब्लॉकचेन एक वितरित लेजर तकनीक है, जो भूमि रिकॉर्ड्स को सुरक्षित, पारदर्शी और अपरिवर्तनीय बनाती है। भारत में इसका विस्तार राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तावित है, जहां हर भूमि पार्सल को एक यूनिक ID (ULPIN) दी जाएगी। यह समय-चिह्नित ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड करेगा, जैसे विक्रय, उत्तराधिकार और मॉर्टगेज।
विस्तार में, यह फर्जी दस्तावेजों को रोकेगा, क्योंकि हर बदलाव ब्लॉक में जुड़ेगा। आंध्र प्रदेश में Zebi Chain सिस्टम से 700,000 रिकॉर्ड्स सुरक्षित हुए। छत्तीसगढ़ में Avalanche ब्लॉकचेन से पारदर्शिता बढ़ी। राष्ट्रीय स्तर पर, यह DILRMP से जुड़ेगा, जहां 95% RoR डिजिटाइज हो चुके हैं। लाभ: विवादों में 50% कमी, त्वरित लोन और निवेश। चुनौतियां: डेटा माइग्रेशन और गोपनीयता। सरकार को पायलट बढ़ाकर इसे 2026 तक लागू करना चाहिए।
#### अन्य भूमि सुधार योजनाएं
भारत में कई अन्य योजनाएं चल रही हैं। SVAMITVA योजना: ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन से मैपिंग, 2.25 करोड़ लोगों को प्रॉपर्टी कार्ड मिले।
DILRMP: भूमि रिकॉर्ड्स का डिजिटाइजेशन, 625,000 गांवों में पूरा। NGDRS: दस्तावेज रजिस्ट्रेशन का एकीकृत सिस्टम।
RCCMS: रेवेन्यू कोर्ट केस मैनेजमेंट। PMAY के तहत भूमि आवंटन। 2026 में, कृषि योजनाओं का विलय (PM-RKVY) और जलवायु-प्रतिरोधी कृषि पर फोकस। राज्य स्तर पर, उत्तर प्रदेश में 70% लक्ष्य हासिल, जहां भूमिहीनों को पट्टे दिए गए।
#### आम नागरिकों को लाभ
भूमि सुधारों से आम नागरिकों को कई लाभ हैं। पहला, आर्थिक सशक्तिकरण: भूमि वितरण से आय बढ़ती है, गरीबी कम होती है। उदाहरण: केरल और पश्चिम बंगाल में किरायेदारों को अधिकार मिलने से उत्पादकता बढ़ी।
दूसरा, सामाजिक न्याय: अनुसूचित जाति/जनजाति और महिलाओं को भूमि अधिकार, जो सशक्तिकरण लाता है। तीसरा, स्वास्थ्य और शिक्षा: बेहतर आय से पोषण और शिक्षा में सुधार।
चौथा, ऋण और निवेश: सुरक्षित रिकॉर्ड्स से बैंक लोन आसान, जो कृषि उन्नति लाता है। अंत में, विवाद कम होने से शांति और विकास। कुल मिलाकर, ये सुधार ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाते हैं।
#### निष्कर्ष
भूमि सुधार भारत की अर्थव्यवस्था और समाज का आधार हैं। तकनीकी मजबूती से विवाद कम होंगे, और योजनाएं आम नागरिकों को लाभ पहुंचाएंगी। सरकार को ब्लॉकचेन और डिजिटाइजेशन पर तेजी से काम करना चाहिए। आम जनता को जागरूक रहना चाहिए और सरकारी पोर्टल्स का उपयोग करें। इससे विकसित भारत का सपना साकार होगा। अधिक जानकारी के लिए, विभाग ऑफ लैंड रिसोर्सेज की वेबसाइट देखें।





