
ब्यूरो रिपोर्ट
विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने विधानसभा सत्र में स्क्रब टायफस को गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बताया और प्रदेश सरकार से इसके व्यापक सर्वेक्षण और नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह बीमारी बारिश के मौसम से लेकर सितंबर-अक्टूबर तक बैतूल, छिंदवाड़ा, हरदा और आसपास के जिलों में तेजी से फैल रही है।
जनजागृति और मिशन मोड में नियंत्रण की जरूरत
डॉ. पंडाग्रे ने कहा कि मलेरिया की तरह स्क्रब टायफस को भी ‘मिशन मोड’ में नियंत्रित किया जाना चाहिए। इसके लिए जनजागृति अभियान चलाया जाए, हॉट स्पॉट की पहचान की जाए और व्यापक सर्वेक्षण किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी मरीजों के किडनी, फेफड़े और लीवर को नुकसान पहुँचा सकती है।
निःशुल्क इलाज और स्वास्थ्य तंत्र में सुधार की मांग विधायक ने यह भी कहा कि इस बीमारी को आयुष्मान योजना में शामिल किया जाए, ताकि मरीजों को निशुल्क इलाज मिल सके। इसके अलावा बैतूल के अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट और एनेस्थेटिक विशेषज्ञ की कमी दूर की जाए। उन्होंने अस्पतालों में मेन्यू कार्ड (सेवा और शुल्क सूची) प्रदर्शित करने की भी मांग की, ताकि मरीज और उनके परिवार स्पष्ट जानकारी पा सकें।
स्क्रब टायफस के लक्षण
स्क्रब टायफस एक बैक्टीरियाई बीमारी है, जो संक्रमित चिगर्स (माइट के लार्वा) के काटने से फैलती है। यह झाड़ियों और घास वाले ग्रामीण इलाकों में अधिक होती है। इसके सामान्य लक्षण हैं: तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, ठंड लगना और पसीना आना। कुछ मामलों में काटे हुए स्थान पर काला घाव भी बन सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह फेफड़े, किडनी और लीवर को प्रभावित कर सकती है। इस बीमारी का इलाज एंटीबायोटिक्स (जैसे डॉक्सीसाइक्लिन या एजिथ्रोमाइसिन) से किया जाता है। समय पर उपचार मिलने पर मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य भारत और महाराष्ट्र के जिलों में यह बीमारी मौसमी खतरे के रूप में उभर रही है, इसलिए जागरूकता और समय पर इलाज बेहद जरूरी है।