
वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सेन
*बैतूल (मध्य प्रदेश),* 8 अप्रैल 2026। जिला न्यायालय बैतूल में भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 52(ख) के तहत दायर पुनरीक्षण याचिका पर 14 फरवरी 2023 को दिए गए न्यायालय के आदेश को वन विभाग ने कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया। न्यायालय ने वाहन स्वामी को धारा 52(5) का पूरा लाभ देते हुए जप्त वाहन को तुरंत मुक्त करने का आदेश दिया था, लेकिन वन विभाग ने वाहन चालक से 13,200 रुपये प्रषमन शुल्क और वाहन स्वामी से 1.50 लाख रुपये वाहन मूल्य जमा करने की शर्त रख दी। इस कार्यवाही को न्यायालय के आदेश की अवहेलना बताते हुए वाहन स्वामी की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई अभी चल रही है।
*क्या था न्यायालय का आदेश?*
न्यायालय ने अपीलीय अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक बैतूल के आदेश को रद्द करते हुए वाहन स्वामी कार्तिक बढ़ाल को धारा 52(5) का लाभ दिया था। आदेश के पैरा 22 में साफ तौर पर यह लाभ दिया गया था, जबकि पैरा 24 में धारा 68 के तहत प्रषमन का उल्लेख था। वन विभाग पैरा 22 की अनदेखी करते हुए पैरा 24 का हवाला दे रहा है और वाहन स्वामी को न्याय से वंचित कर रहा हैं।
*वन विभाग का तर्क*
वन विभाग का कहना है कि रेत खनिज वन उपज है, इसलिए धारा 68(1) के तहत वाहन का मूल्य जमा करने पर ही वाहन छोड़ा जा सकता है। विभाग 6,600 रुपये प्रति घनमीटर की दर से 3 घनमीटर रेत का 13,200 रुपये प्रषमन शुल्क वाहन चालक सोनू उईके से मांग रहा है। विभाग का दावा है कि खनिज रेत वन उपज होने के कारण यह राशि जमा करनी होगी तथा वाहन का अंकलित मूल्य 01 लाख 50 हजार रूपए वाहन स्वामी को जमा करना होगा तभी वाहन मुक्त हो सकता हैं।
*वाहन स्वामी का पक्ष*
वाहन स्वामी के अधिवक्ता भारत सेन ने जिला न्यायालय बैतूल में अवमानना याचिका (एमजेसीआर 307/2023) दायर की। उन्होंने तत्कालीन एसडीओ सारणी अनादि बुधौलिया और सीसीएफ प्रफुल्ल फुलझेले को पक्षकार बनाया। अधिवक्ता भारत सेन का तर्क है:
– न्यायालय का आदेश साफ था कि धारा 52(5) के तहत वाहन स्वामी को लाभ मिल चुका है, इसलिए वाहन तुरंत मुक्त होना चाहिए था।
– वन विभाग ने पैरा 22 के अनुसार वाहन मुक्त नहीं कर तथा 01 लाख 50 हजार रूपए का मूल्यांकन राशि की मांग कर न्यायालय के आदेश को विफल कर दिया। वन विभाग वाहन की वर्तमान कीमत मांग रहा हैं।
– खनिज रेत का मूल्यांकन करने का अधिकार वन विभाग को नहीं, बल्कि खनिज साधन विभाग, मंत्रालय वल्लभ भवन, भोपाल को है।
– यदि वन विभाग को दर निर्धारण का अधिकार है तो वह राजपत्र (गजट नोटिफिकेशन) न्यायालय में पेश करे। विभाग केवल “विभागीय प्रचलित दर” बता रहा है, लेकिन कोई आधिकारिक गजट पेश नहीं कर पा रहा।
*कब हुआ था वाहन जप्त?*
वन अपराध क्रमांक 69/40 के तहत 22 अक्टूबर 2021 को ट्रैक्टर-ट्रॉली (ट्रॉली नंबर 22.10.2021) को धारा 26(1)(छ), 41(2) तथा मध्य प्रदेश वनोपज नियम 2000 के नियम 3 एवं 22(3) के अंतर्गत वन क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते हुए जप्त किया गया था। वाहन स्वामी कार्तिक बढ़ाल पिछले करीब 5 साल से लगातार कानूनी संघर्ष कर रहे हैं।
*सुनवाई का मुद्दा*
अवमानना याचिका में मुख्य बहस का विषय न्यायालय के पुनरीक्षण याचिका क्रमांक 57/2022 में आदेश के पैरा 22 और 24 हैं। अधिवक्ता भारत सेन का कहना हैं कि पैरा 22 के अनुसरण में वाहन तत्काल मुक्त होना था जबकि वन विभाग प्रशमन की कार्यवाही करते हुए वाहन का मूल्य एवं खनिज का मूल्य मांग रहा हैं। न्यायालय इस बात की जांच कर रहा है कि क्या वन विभाग ने जानबूझकर न्यायिक आदेश की अवहेलना की। सुनवाई अभी जारी है।
यह मामला वन विभाग की कार्यशैली और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर सवाल खड़ा कर रहा है। वाहन स्वामी का कहना है कि 5 साल से न्याय की राह में भटक रहे हैं, जबकि न्यायालय ने साफ आदेश दे दिया था।





