
विशेष संवाददाता, आठनेर (बैतूल):
मध्य प्रदेश सरकार के खनिज साधन विभाग द्वारा लागू ‘मध्य प्रदेश रेत नियम 2018’ का नियम 4 साफ तौर पर गरीबों और वंचितों को रेत पर पहला अधिकार देता है। इस नियम के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक उपयोग के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के स्वीकृत हितग्राहियों को स्वयं के मकान निर्माण के लिए पूर्णतः निशुल्क (बिना किसी रॉयल्टी या खनिज शुल्क के) रेत उपलब्ध कराई जाएगी।
परंतु, बैतूल जिले के आठनेर विकासखंड में इस जनहितैषी कानून को सरकारी फाइलों में दफन कर दिया गया है। आठनेर की रहने वाली बुजुर्ग विधवा कमला डढोरे, जो अपनी वृद्धावस्था पेंशन और राशन दुकान के सरकारी अनाज पर जीवन यापन करती हैं, आज इस नियम के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं। नियम 4 का लाभ न मिलने के कारण उनका पीएम आवास का पक्का मकान आधा-अधूरा ही खड़ा रह गया है, क्योंकि उनके पास बाजार से हजारों रुपये प्रति डंपर रेत खरीदने के पैसे नहीं हैं।
## क्या कहता है मप्र रेत नियम 2018 का ‘नियम 4’ और ‘नियम 5’?
कानूनी तौर पर यह पूरी व्यवस्था आपस में जुड़ी हुई है, जिसका मैदानी स्तर पर मखौल उड़ाया जा रहा है:
1. नियम 4 (शुल्क से छूट): यह नियम ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं के उपयोग, कृषि कार्यों और पीएम आवास के निर्माण के लिए मुफ्त रेत निकालने और ले जाने की कानूनी छूट देता है।
2. नियम 5 व 6 (पंचायतों का नियंत्रण): इन नियमों के तहत खदानों की घोषणा कर उनका नियंत्रण स्थानीय ग्राम पंचायतों को सौंपना था, ताकि पंचायतें अपने क्षेत्र के गरीब हितग्राहियों को आसानी से मुफ्त रेत की पर्ची/टीपी (ट्रांजिट पास) जारी कर सकें।
आठनेर के ग्रामीणों का आरोप है कि खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की साठगांठ से इन नियमों को पूरी तरह ठेंगा दिखा दिया गया है। पंचायतों के अधिकारों पर रेत माफिया का कब्जा है, जिसके कारण नियम 4 के तहत मिलने वाली मुफ्त रेत सीधे माफिया की जेबों में ऊंचे दामों पर बिक रही है।
## 1.50 लाख की कम राशि और महंगी रेत की दोहरी मार
ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वीकृत 1 लाख 50 हजार रुपये की आवास राशि पहले ही बढ़ती महंगाई (सीमेंट, सरिया, मजदूरी) के कारण बेहद कम है। इस सीमित बजट में एक अदद मकान का ढांचा खड़ा करना भी मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में जब प्रशासन नियम 4 का पालन न कराकर हितग्राहियों को मुफ्त रेत नहीं दिला पाता, तो गरीबों पर आर्थिक बोझ दोगुना हो जाता है। आठनेर के जागरूक नागरिकों ने अब पुरजोर मांग उठाई है कि:
* नियमों का उल्लंघन करने वाले लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और हितग्राहियों को तुरंत मुफ्त रेत दिलाई जाए।
* आसमान छूती महंगाई को देखते हुए ग्रामीण पीएम आवास की राशि को 1.50 लाख से बढ़ाकर सीधे 3 लाख रुपये किया जाए।
## आंदोलन की राह पर ग्रामीण
यदि बेवा कमला बाई जैसी असहाय वृद्ध महिलाओं और अन्य गरीब ग्रामीणों को नियम 4 के तहत उनका कानूनी हक नहीं मिला, तो क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनपद मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की चेतावनी दी है। देखना होगा कि बैतूल जिला प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार और नियम विरोधी कार्यशैली पर क्या संज्ञान लेता है।