
ब्यूरो रिपोर्ट
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) में शनिवार तड़के करीब पौने दो बजे एक बड़ा हादसा हो गया। यहां नवजातों को गर्म रखने वाली एक वॉर्मर मशीन में अचानक शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। इस हादसे में वॉर्मर में रखे तीन नवजात शिशु गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें से एक बच्ची की जबलपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई है।
वॉर्मर मशीन में स्पार्किंग से भड़की आग
जानकारी के अनुसार, इन नवजात बच्चों को जन्म के बाद शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए पालने वाले वॉर्मर (Cradle Warmer) में रखा गया था। रात करीब 1:50 बजे वॉर्मर की हीटिंग यूनिट के फिलामेंट में अचानक बिजली का शॉर्ट सर्किट हुआ और चिंगारी निकली। चूंकि वहां बच्चों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई भी चालू थी, इसलिए वॉर्मर के गद्दे व कपड़े ने तुरंत आग पकड़ ली और वहां भीषण आग भड़क उठी।
जानकारी के अनुसार, इन नवजात बच्चों को जन्म के बाद शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए पालने वाले वॉर्मर (Cradle Warmer) में रखा गया था। रात करीब 1:50 बजे वॉर्मर की हीटिंग यूनिट के फिलामेंट में अचानक बिजली का शॉर्ट सर्किट हुआ और चिंगारी निकली। चूंकि वहां बच्चों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई भी चालू थी, इसलिए वॉर्मर के गद्दे व कपड़े ने तुरंत आग पकड़ ली और वहां भीषण आग भड़क उठी।
स्टाफ की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा
घटना के वक्त वार्ड में करीब 33 नवजात बच्चे भर्ती थे। आग लगते ही ऑन-ड्यूटी अस्पताल स्टाफ ने तुरंत मुस्तैदी दिखाई और अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) का उपयोग कर आग पर काबू पाया। स्टाफ ने तुरंत ऑक्सीजन सप्लाई लाइन बंद की और वार्ड में मौजूद अन्य 30 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बहुत बड़ा हादसा होने से बच गया।
घटना के वक्त वार्ड में करीब 33 नवजात बच्चे भर्ती थे। आग लगते ही ऑन-ड्यूटी अस्पताल स्टाफ ने तुरंत मुस्तैदी दिखाई और अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) का उपयोग कर आग पर काबू पाया। स्टाफ ने तुरंत ऑक्सीजन सप्लाई लाइन बंद की और वार्ड में मौजूद अन्य 30 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बहुत बड़ा हादसा होने से बच गया।
पीडियाट्रिक सर्जन न होने से जबलपुर किया गया रेफर
आग की चपेट में आए तीनों झुलसे बच्चों को अस्पताल स्टाफ ने तुरंत बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार दिया। हालांकि, छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में कोई पीडियाट्रिक सर्जन (शिशु शल्य चिकित्सक) उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण डॉक्टरों की देखरेख में तीनों बच्चों को तुरंत जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
आग की चपेट में आए तीनों झुलसे बच्चों को अस्पताल स्टाफ ने तुरंत बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार दिया। हालांकि, छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में कोई पीडियाट्रिक सर्जन (शिशु शल्य चिकित्सक) उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण डॉक्टरों की देखरेख में तीनों बच्चों को तुरंत जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
इलाज के दौरान मासूम ने तोड़ा दम, सरकार की बड़ी घोषणाएं
जबलपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान झुलसे हुए 3 बच्चों में से एक बच्ची ने दम तोड़ दिया। वह आग की सीधी चपेट में आने के कारण अधिक झुलस गई थी। इस हृदयविदारक घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया है और बड़ी घोषणाएं की हैं:
जबलपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान झुलसे हुए 3 बच्चों में से एक बच्ची ने दम तोड़ दिया। वह आग की सीधी चपेट में आने के कारण अधिक झुलस गई थी। इस हृदयविदारक घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया है और बड़ी घोषणाएं की हैं:
- आर्थिक सहायता: मृतक बच्ची के शोकाकुल परिवार को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने के निर्देश दिए गए हैं।
- मुफ्त इलाज: जबलपुर में उपचाराधीन अन्य दोनों घायल बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
फिलहाल, प्रशासन और पुलिस की टीमें अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं और हादसे के तकनीकी कारणों तथा लापरवाही की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।






