
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में बिना किसी सरकारी मान्यता और वैध दस्तावेजों के संचालित हो रहे एक मदरसे पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने बड़ी छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया है। झांसी रोड थाना क्षेत्र के एजी ऑफिस के पास स्थित ‘मदरसा ए दारुल उल कुरान’ में औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमले ने 22 से अधिक बच्चों और बच्चियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है ।
जांच के दौरान मदरसे में बच्चों के रहने के अमानवीय हालात, सुरक्षा में घोर लापरवाही और अनिवार्य शिक्षा के उल्लंघन के कई गंभीर मामले उजागर हुए हैं।
गुप्त सूचना पर पहुंची अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा की टीम
बाल कल्याण समिति (CWC) और बाल अधिकार संरक्षण आयोग को गुप्त सूचना मिली थी कि इस परिसर में बिना किसी पंजीयन के अवैध रूप से बच्चों को रखा जा रहा है। इस इनपुट के आधार पर आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने महिला बाल विकास विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस बल के साथ शुक्रवार को अचानक दबिश दी। टीम को देखकर मदरसा प्रबंधन और वहां मौजूद स्टाफ में हड़कंप मच गया।
जांच में खुलीं गंभीर अनियमितताएं, बंद कमरे में छिपाई गई थीं बच्चियां
आयोग की अध्यक्ष ने मीडिया को बताया कि निरीक्षण के दौरान प्रबंधन से संचालन, मान्यता और बच्चों से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे कोई भी कानूनी अभिलेख या वैध कागजात पेश नहीं कर सके । जांच के दौरान मौके पर निम्नलिखित बड़ी खामियां पाई गईं:
- रजिस्टर और उपस्थिति में बड़ा अंतर: मदरसे के रिकॉर्ड में 15 बच्चियों और 42 बालकों के प्रवेश फॉर्म मिले, लेकिन मौके पर संख्या काफी कम थी।
- छिपाई गई बच्चियों की मौजूदगी: शुरुआती पूछताछ में प्रबंधन ने केवल लड़कों के होने की बात कही थी, लेकिन सघन तलाशी के दौरान पीछे की तरफ एक बंद कमरे में 8 नाबालिग बच्चियां बदहाल स्थिति में मिलीं, जिनमें सबसे छोटी बच्ची महज 4 साल की है।
- गंदगी और अमानवीय हालात: बच्चों के रहने के कमरे, बिस्तर और रजाई बेहद गंदे थे। परिसर में साफ-सफाई का घोर अभाव था और टॉयलेट्स तक में दरवाजे नहीं लगे पाए गए।
- अनिवार्य शिक्षा (RTE) का उल्लंघन: यहां मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बच्चे रह रहे थे। जांच में पता चला कि ये बच्चे नियमित रूप से सामान्य स्कूल नहीं जा रहे थे और उन्हें मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा से पूरी तरह अलग रखा गया था।
- स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं: मदरसे में तैनात किसी भी स्टाफ या कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया था और बच्चों से बिना किसी पक्की रसीद के अवैध रूप से फीस वसूली जा रही थी।
अवैध मदरसा सील करने के आदेश, CWC के संरक्षण में भेजे गए बच्चे
इस बड़ी कार्रवाई के बाद प्रशासनिक अधिकारियों (SDM) की मौजूदगी में नियमों के विरुद्ध और असुरक्षित रूप से संचालित हो रहे इस मदरसे को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है ।
रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया है। आयोग के निर्देशों के अनुसार, उनकी सुरक्षा और देखरेख को ध्यान में रखते हुए 6 साल से कम उम्र की बच्चियों को शिशु गृह, बड़ी बालिकाओं को वन स्टॉप सेंटर और लड़कों को उम्र के आधार पर सुरक्षित बाल गृहों में स्थानांतरित किया गया है। प्रशासन अब मदरसा संचालक संस्था ‘अंजुमन इस्लाहे मुआशरा समिति’ और प्रबंधन के खिलाफ कानूनी (विधिक) कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।






