ग्वालियर के कम्पू स्थित ऐतिहासिक सांदीपनि पद्मा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (सीएम राइज प्रोजेक्ट) की निर्माणाधीन बिल्डिंग का स्लैब (छत) कास्टिंग के दौरान ढहने के मामले को मध्य प्रदेश शासन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े रुख के बाद, भोपाल से आई उच्च स्तरीय तकनीकी जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर लोक निर्माण विभाग (PIU) ने बड़ी कार्रवाई की है। निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरतने और मौके पर सुपरविजन न करने के दोषी सहायक यंत्री (AE) पी.के. गुप्ता और उपयंत्री (Sub Engineer) वीरेंद्र सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट इंजीनियर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
भोपाल की जांच टीम को मिली बड़ी तकनीकी लापरवाही
घटना के तुरंत बाद भोपाल से आई विशेषज्ञ इंजीनियरों की विशेष जांच टीम ने हादसे के कारणों की बारीकी से पड़ताल की। जांच में सामने आया कि जब नए भवन की तीसरी मंजिल पर स्लैब कास्टिंग (छत ढलाई) का काम चल रहा था, तब सेंट्रिंग और शटरिंग के सपोर्ट बेहद कमजोर थे। मरुम वाली गीली जमीन पर बिना कंक्रीट ब्लॉक या लोहे की प्लेट रखे सीधे जैक और बांस-बल्ली टिकवा दिए गए थे। कंक्रीट के भारी वजन और वाइब्रेटर चलने के कारण नीचे की जमीन धंस गई और पूरी छत भरभराकर नीचे गिर गई।
सुपरविजन करने वाले इंजीनियरों पर गिरी गाज
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि इतने बड़े सीएम राइज (CM Rise) स्कूल प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान जिम्मेदार सरकारी इंजीनियर मौके से नदारद थे। उनकी अनुपस्थिति में ही ठेकेदार ने मानकों की अनदेखी कर ढलाई का काम शुरू कर दिया।
- इन पर हुई कार्रवाई: पीआईयू (PIU) के मुख्य अभियंता ने आदेश जारी कर सहायक यंत्री पी.के. गुप्ता और उपयंत्री वीरेंद्र सिंह चौहान को पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही और शिथिलता का दोषी पाते हुए सस्पेंड कर दिया है। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय संभागीय कार्यालय तय किया गया है।
- प्रोजेक्ट इंजीनियर को नोटिस: निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट इंजीनियर को भी कारण बताओ (Show Cause) नोटिस थमाया गया है कि क्यों न उनकी कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
भविष्य में ब्लैकलिस्ट हो सकता है ठेकेदार
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शुरुआती तौर पर निर्माण कार्य को पूरी तरह से रुकवा दिया गया है। मलबे के सैंपल लैब टेस्ट के लिए भेजे गए हैं ताकि कंक्रीट और सरिए की गुणवत्ता जांची जा सके। यदि मटेरियल में मिलावट पाई गई, तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने और उसे ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी भी विभाग ने कर ली है। शासन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि बच्चों की सुरक्षा और सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी या ठेकेदार को बख्शा नहीं जाएगा।






