
mahila adhikari jail मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने छतरपुर जनपद पंचायत की तत्कालीन ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी को रिश्वत लेने का दोषी पाते हुए 3 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला छतरपुर न्यायालय के न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत द्वारा सुनाया गया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए शौचालयों के भुगतान से जुड़ा है। तत्कालीन ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी पर आरोप था कि वे हितग्राहियों के शौचालय निर्माण की राशि जारी करने (भुगतान करने) के बदले प्रति शौचालय 500 रुपये की रिश्वत मांग रही थीं।
यह मामला स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए शौचालयों के भुगतान से जुड़ा है। तत्कालीन ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी पर आरोप था कि वे हितग्राहियों के शौचालय निर्माण की राशि जारी करने (भुगतान करने) के बदले प्रति शौचालय 500 रुपये की रिश्वत मांग रही थीं।
लोकायुक्त ने किया था रंगे हाथों गिरफ्तार
रिश्वत मांगे जाने की शिकायत मिलने के बाद सागर लोकायुक्त पुलिस की टीम ने जाल बिछाया था। लोकायुक्त पुलिस ने 18 फरवरी 2020 को कार्रवाई करते हुए नीलम तिवारी mahila adhikari jail को रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। लोकायुक्त ने मामले की विस्तृत जांच के बाद चालान न्यायालय में पेश किया था।
रिश्वत मांगे जाने की शिकायत मिलने के बाद सागर लोकायुक्त पुलिस की टीम ने जाल बिछाया था। लोकायुक्त पुलिस ने 18 फरवरी 2020 को कार्रवाई करते हुए नीलम तिवारी mahila adhikari jail को रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। लोकायुक्त ने मामले की विस्तृत जांच के बाद चालान न्यायालय में पेश किया था।
6 साल बाद आया कोर्ट का फैसला
डीपीओ (जिला अभियोजन अधिकारी) प्रवेश अहिरवार के मुताबिक, करीब छह साल तक चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव ने आरोपी नीलम तिवारी को दोषी करार दिया और mahila adhikari jail उन्हें 3 वर्ष के जेल की सजा सुनाई। भ्रष्टाचार के खिलाफ कोर्ट के इस कड़े फैसले की इलाके में काफी चर्चा है।
डीपीओ (जिला अभियोजन अधिकारी) प्रवेश अहिरवार के मुताबिक, करीब छह साल तक चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव ने आरोपी नीलम तिवारी को दोषी करार दिया और mahila adhikari jail उन्हें 3 वर्ष के जेल की सजा सुनाई। भ्रष्टाचार के खिलाफ कोर्ट के इस कड़े फैसले की इलाके में काफी चर्चा है।






