
मुनि आस्तिक की अनूठी कथा और नागों को भाई मानने की वह परंपरा, जिसने समाज को दिया प्रकृति और जीव संरक्षण का अनोखा संदेश।
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सनातन परंपरा में नाग पंचमी के रूप में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व और भी खास हो गया है, क्योंकि आज सावन का तीसरा सोमवार भी है और उदयातिथि के अनुसार नाग पंचमी का व्रत-पूजन भी इसी दिन किया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नाग देवता की विशेष पूजा-अर्चना करने से कुंडली के कालसर्प दोष और सर्प भय से मुक्ति मिलती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पावन पर्व को मनाए जाने के पीछे का असली पौराणिक रहस्य और कथा क्या है? आइए जानते हैं नाग पंचमी से जुड़ी दो सबसे प्रसिद्ध कहानियां:
1. जब राजा जन्मेजय के महाविनाशकारी ‘नाग यज्ञ’ को रोका गया (महाभारत काल की कथा)
पौराणिक इतिहास के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डसने के कारण हुई थी। इसका बदला लेने के लिए उनके पुत्र राजा जन्मेजय ने पूरे सर्प वंश को समाप्त करने के लिए एक विनाशकारी ‘सर्प सत्र यज्ञ’ (नाग यज्ञ) का आयोजन किया। यज्ञ की अग्नि इतनी शक्तिशाली थी कि संसार भर के सांप खिंचे चले आ रहे थे और उसमें भस्म हो रहे थे।
तब नागों की रक्षा के लिए महान मुनि आस्तिक आगे आए। उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता और वेदों के ज्ञान से राजा जन्मेजय को शांत किया और इस महाविनाशकारी यज्ञ को रुकवाया。 जिस दिन यह यज्ञ रुका और नागों के प्राण बचे, वह सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी का ही दिन था। अग्नि से झुलसे नागों के शरीर को शीतलता प्रदान करने के लिए उन पर ठंडा दूध डाला गया था, तभी से नाग पंचमी पर नाग देवता को दूध अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।
2. जब नाग देवता बने छोटी बहू के ‘धर्म भाई’ (लोक कथा)
एक अन्य लोकप्रिय पौराणिक कथा के अनुसार, एक परिवार में सात भाई और उनकी पत्नियां थीं। सबसे छोटी बहू का पीहर (मायका) नहीं था और न ही उसका कोई भाई था। सावन के महीने में जब सभी बहुएं मायके जाने लगीं, तो वह दुखी होकर तालाब किनारे रोने लगी。 वहां मिट्टी खोदते समय एक नाग प्रकट हुआ, जिसे उसने आदरपूर्वक ‘सर्प भैया’ कहकर पुकारा。
छोटी बहू के इस प्रेम और आदर से प्रसन्न होकर नाग देव ने उसे अपनी बहन मान लिया。 वे मानव रूप धारण कर उसके घर आए और उसे मायके (नागलोक) ले गए, जहां उसे अपार स्नेह और धन-धान्य मिला。 जब उसके पति ने धन के स्रोत पर संदेह किया, तो नाग देव स्वयं उसकी रक्षा के लिए प्रकट हुए。 यही कारण है कि आज के दिन महिलाएं नाग देवता को अपना भाई मानकर उनकी पूजा करती हैं ताकि उनके सुहाग और परिवार की रक्षा हो सके।
जीवित सांपों को दूध पिलाने के बजाय करें यह उपाय (वैज्ञानिक व धार्मिक महत्व)
शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि नाग पंचमी के दिन जीवित सांपों को पकड़ना या जबरन दूध पिलाना उचित नहीं है, क्योंकि दूध पीना सांपों के प्राकृतिक आहार का हिस्सा नहीं है और इससे उनकी मृत्यु भी हो सकती है।
- सही तरीका: इस दिन घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से नाग की आकृति बनाएं अथवा भगवान शिव के गले में लिपटे नाग देवता की मूर्ति या चित्र पर श्रद्धापूर्वक दूध, दूर्वा, अक्षत और फूल अर्पित करें। यह पर्व हमें प्रकृति के संतुलन और सभी जीवों के प्रति करुणा रखना सिखाता है。