
Dairy Analogue Mava रक्षाबंधन के पावन त्योहार से ठीक पहले मध्य प्रदेश के देवास जिले से मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री और प्रशासन की सख्ती के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासनिक अमले ने देवास के प्रसिद्ध जोधपुर स्वीट्स सहित कई मिठाई प्रतिष्ठानों और उनके गोदामों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस छापामार कार्रवाई में मध्य प्रदेश में पूरी तरह से प्रतिबंधित ‘एनालॉग मावा’ (सिंथेटिक और केमिकल युक्त नकली मावा) और उससे तैयार की गई मिठाइयों का जखीरा बरामद किया गया है। प्रशासन ने मौके से 900 किलो से ज्यादा नकली मावा और दूषित मिठाइयां जब्त कर गोदामों को सील कर दिया है।
जोधपुर स्वीट्स के गोदामों में चल रहा था मिलावट का काला खेल
त्योहारों के सीजन में भारी मुनाफे के लालच में जनता की सेहत से खिलवाड़ करने का यह खेल देवास के नामचीन प्रतिष्ठानों में धड़ल्ले से चल रहा था। मुखबिर की सटीक सूचना पर जब प्रशासनिक अधिकारियों और खाद्य सुरक्षा इंस्पेक्टरों की संयुक्त टीम ने जोधपुर स्वीट्स के मुख्य ठिकानों और उनके भंडारण गोदामों पर अचानक दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। गोदामों के भीतर भारी मात्रा में ऐसा मावा मिला जो दूध से नहीं, बल्कि सेहत के लिए खतरनाक माने जाने वाले प्रतिबंधित ‘एनालॉग’ तरीके (केमिकल, डिटर्जेंट, घटिया तेल और पाउडर) से तैयार किया गया था।
900 किलो से ज्यादा सिंथेटिक मावा और मिठाइयां जब्त, गोदाम सील
प्रशासनिक अमले ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से 900 किलोग्राम से अधिक वजन का प्रतिबंधित एनालॉग मावा, दूषित रसगुल्ले, पेड़े और त्योहार के लिए एडवांस में बनाकर रखी गई अन्य मिठाइयां अपने कब्जे में ले लीं। इस मिलावटी सामान की बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से मिलावटी मावे और मिठाइयों के कई संदिग्ध सैंपल (नमूने) एकत्र किए हैं, जिन्हें राजकीय प्रयोगशाला (लैब) में जांच के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई करते हुए मिलावटखोरी के मुख्य केंद्र बने इन गोदामों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है।
क्या होता है ‘एनालॉग मावा’ और क्यों है यह सेहत के लिए खतरनाक?
खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, एनालॉग मावा पूरी तरह से नकली और सिंथेटिक होता है। इसे बनाने में दूध की एक भी बूंद का इस्तेमाल नहीं किया जाता। बल्कि स्किम्ड मिल्क पाउडर, घटिया क्वालिटी के पाम ऑयल (ताड़ का तेल), स्टार्च, डिटर्जेंट पाउडर, यूरिया और जानलेवा रसायनों को मिलाकर इसे असली मावे जैसा रूप दिया जाता है। मध्य प्रदेश सरकार ने इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर रखा है। इसका सेवन करने से लीवर, किडनी और पेट की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जो त्योहार की मिठास को पल भर में बीमारी में बदल सकती हैं।
मिठाई खरीदने से पहले जरा संभलकर… प्रशासन की जनता से अपील
इस बड़ी कार्रवाई के बाद देवास जिला प्रशासन और खाद्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि रक्षाबंधन के इस सीजन में मिठाई खरीदने से पहले पूरी सावधानी बरतें। बहुत ज्यादा चटक रंग वाली, अत्यधिक सस्ती या संदिग्ध दुकानों से मावे की मिठाइयां खरीदने से बचें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि मिलावटखोरों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा और जोधपुर स्वीट्स सहित जितने भी प्रतिष्ठानों पर यह प्रतिबंध सामग्री मिली है, उनके मालिकों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम (FSSAI) और रासुका (NSA) जैसी सख्त धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




