
नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम National Payments Corporation of India (NPCI) द्वारा ₹2,000 से अधिक के यूपीआई (UPI) भुगतानों पर ₹5 का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले के खिलाफ देशभर के पेट्रोल पंप डीलरों ने मोर्चा खोल दिया है। ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (AIPDA) और फेडरेशन ऑफ ऑल India पेट्रोलियम ट्रेडर्स (FAIPT) सहित विभिन्न संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें इस शुल्क से छूट नहीं दी गई, तो वे ₹2,000 से ऊपर के डिजिटल भुगतान स्वीकार करना बंद कर देंगे और पूरी तरह नकद (कैश) पर लौट जाएंगे। यह नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने जा रही है।
डीलरों का तर्क: पहले से ही कम है मुनाफा मार्जिन National Payments Corporation of India
द वॉयर की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि वे तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा तय किए गए बेहद सीमित मार्जिन पर काम करते हैं। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मुंबई, कर्नाटक और राजस्थान के डीलरों के अनुसार, प्रति लीटर ईंधन पर उनका प्रॉफिट मार्जिन महज ₹2.40 से ₹3.40 के बीच होता है। ऐसे में, ₹2,000 से अधिक के हर एक ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चुकाना उनके कम मार्जिन वाले इस कारोबार पर और ज्यादा आर्थिक दबाव डालेगा।
द वॉयर की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि वे तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा तय किए गए बेहद सीमित मार्जिन पर काम करते हैं। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मुंबई, कर्नाटक और राजस्थान के डीलरों के अनुसार, प्रति लीटर ईंधन पर उनका प्रॉफिट मार्जिन महज ₹2.40 से ₹3.40 के बीच होता है। ऐसे में, ₹2,000 से अधिक के हर एक ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चुकाना उनके कम मार्जिन वाले इस कारोबार पर और ज्यादा आर्थिक दबाव डालेगा।
ग्राहकों पर नहीं, व्यापारियों पर पड़ेगा सीधा असर
National Payments Corporation of India NPCI ने स्पष्ट किया है कि यह ₹5 का चार्ज मर्चेंट-साइड (व्यापारी की ओर) है, जिसे आम ग्राहकों से सीधे नहीं वसूला जा सकता। पेट्रोल पंपों पर होने वाले कुल लेनदेन में से लगभग 60% से अधिक भुगतान डिजिटल माध्यमों से होते हैं। हालांकि ₹2,000 से कम के दैनिक भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं है, लेकिन कारों, ट्रकों या एसयूवी में फुल टैंक ईंधन भरवाने वाले ग्राहकों का बिल अक्सर ₹2,000 से ऊपर जाता है। यदि डीलर नकद पर लौटने की अपनी चेतावनी पर अमल करते हैं, तो आम जनता को फिर से एटीएम की लंबी लाइनों और नकद भुगतान की असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
National Payments Corporation of India NPCI ने स्पष्ट किया है कि यह ₹5 का चार्ज मर्चेंट-साइड (व्यापारी की ओर) है, जिसे आम ग्राहकों से सीधे नहीं वसूला जा सकता। पेट्रोल पंपों पर होने वाले कुल लेनदेन में से लगभग 60% से अधिक भुगतान डिजिटल माध्यमों से होते हैं। हालांकि ₹2,000 से कम के दैनिक भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं है, लेकिन कारों, ट्रकों या एसयूवी में फुल टैंक ईंधन भरवाने वाले ग्राहकों का बिल अक्सर ₹2,000 से ऊपर जाता है। यदि डीलर नकद पर लौटने की अपनी चेतावनी पर अमल करते हैं, तो आम जनता को फिर से एटीएम की लंबी लाइनों और नकद भुगतान की असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
वित्त मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग
डीलरों के विभिन्न संघों ने वित्त मंत्री और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को पत्र लिखकर ईंधन खुदरा विक्रेताओं (Fuel Retailers) को इस दायरे से पूरी तरह बाहर रखने (छूट देने) की मांग की है। इस मांग को लेकर पेट्रोलियम अधिकारियों और डीलर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के बीच बैठकें भी शुरू हो गई हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक छूट को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है।
डीलरों के विभिन्न संघों ने वित्त मंत्री और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को पत्र लिखकर ईंधन खुदरा विक्रेताओं (Fuel Retailers) को इस दायरे से पूरी तरह बाहर रखने (छूट देने) की मांग की है। इस मांग को लेकर पेट्रोलियम अधिकारियों और डीलर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के बीच बैठकें भी शुरू हो गई हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक छूट को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है।





