
वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सेन
*बैतूल, 17 फरवरी 2026* – बैतूल की न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी सुश्री रश्मि खुराना ने धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के दो मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आरोपी की याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने परिवादी (कमला ट्रेडर्स) को वर्ष 2020 की बैलेंस शीट के साथ-साथ जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यदि परिवादी 26 फरवरी 2026 तक ये दस्तावेज अदालत में पेश नहीं करता, तो प्रतिकूल अनुमान लगाया जाएगा।
ये मामले कृष्णवी इंडस्ट्रीज एवं अनूपश्री एम्पोरियम द्वारा कमला ट्रेडर्स के खिलाफ चेक अनादरण (बाउंस) के हैं। कुल चेक राशि लगभग 10 लाख रुपये (5 लाख 53 हजार और 4 लाख 50 हजार) है। परिवादी ने मामले को मजबूत करने के लिए टैक्स इनवॉइस पेश किए थे, लेकिन बचाव पक्ष के अधिवक्ता भारत सेन ने *भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 94* के तहत याचिका दायर कर परिवादी से जीएसटी रिटर्न मांगने की मांग की थी।
अधिवक्ता भारत सेन का मुख्य तर्क था कि *जीएसटी अधिनियम, 2017* के तहत टैक्स इनवॉइस जारी करने के बाद रजिस्टर्ड व्यापारी के लिए जीएसटी रिटर्न (जैसे GSTR-1, GSTR-3B आदि) दाखिल करना अनिवार्य है। टैक्स इनवॉइस फर्जी भी हो सकते हैं, क्योंकि बिना वास्तविक माल सप्लाई के भी इन्हें जनरेट किया जा सकता है, जो जीएसटी कानून के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
### जीएसटी अधिनियम, 2017 में टैक्स इनवॉइस और रिटर्न की अनिवार्यता की व्याख्या
जीएसटी अधिनियम, 2017 (CGST Act) के तहत रजिस्टर्ड डीलरों के लिए प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
– *धारा 31* के अनुसार, कर योग्य माल या सेवाओं की सप्लाई पर रजिस्टर्ड व्यक्ति को *टैक्स इनवॉइस* जारी करना अनिवार्य है। इनवॉइस में सप्लायर और रिसीवर का GSTIN, इनवॉइस नंबर, तारीख, माल/सेवा का विवरण, मात्रा, मूल्य, टैक्स आदि शामिल होने चाहिए।
– टैक्स इनवॉइस जारी करने के बाद, रजिस्टर्ड व्यक्ति को *आउटवर्ड सप्लाई* (बिक्री) का विवरण *धारा 37* के तहत GSTR-1 में दाखिल करना पड़ता है (मासिक या त्रैमासिक)।
– *धारा 39* के तहत रिटर्न फाइलिंग अनिवार्य है, जिसमें GSTR-3B (समरी रिटर्न) में टैक्स पेमेंट और ITC क्लेम की जानकारी दी जाती है। यहां तक कि यदि कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ हो, तो भी निल रिटर्न फाइल करना जरूरी है।
– टैक्स इनवॉइस फर्जी जारी करना या बिना वास्तविक सप्लाई के इनवॉइस बनाना *धारा 122* के तहत दंडनीय है। इसमें 10,000 रुपये या टैक्स की राशि का 100% जुर्माना (जो अधिक हो) लग सकता है। यदि फर्जी इनवॉइस से ITC क्लेम किया गया या टैक्स चोरी हुई, तो *धारा 132* के तहत आपराधिक मुकदमा भी चल सकता है, जिसमें 5 करोड़ तक की चोरी पर 5 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और जीएसटी कानून का अवलोकन करने के बाद यह निर्देश दिया है, ताकि टैक्स इनवॉइस की वैधता और वास्तविक लेन-देन की पुष्टि हो सके। यह फैसला चेक बाउंस मामलों में जीएसटी अनुपालन की जांच को मजबूत बनाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि परिवादी के दावे प्रमाणित हों।
परिवादी अब 26 फरवरी 2026 तक जीएसटी रिटर्न और बैलेंस शीट पेश करेगा, जिससे मामले की आगे की सुनवाई प्रभावित होगी। यह निर्णय व्यापारिक विवादों में जीएसटी दस्तावेजों की महत्वपूर्णता को रेखांकित करता है।