
ब्यूरो रिपोर्ट
- सतपुड़ा प्लांट के कोल सैंपलिंग में काम करने वाले ठेका श्रमिकों का किया जा रहा शोषण
- ठेका श्रमिकों के शोषण के मामले में आरती इंटरप्राइजेज के प्रो. प्रेम सातनकर पर पूर्व में भी दर्ज हो चुकी है एफआईआर
सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट के कोल हैडडिंग प्लांट C.h p -4 में कोल सैंपलिंग का 1 वर्ष का ठेका निकल गया है यह कार्य आरती इंटरप्राइजेज को मिला है जिसमें ठेकेदार द्वारा 8 कुशल श्रमिक लगाए जाने हैं जिसमें आरती इंटरप्राइजेज के प्रो .प्रेम सातनकर द्वारा कार्य आरंभ से ही 6 ठेका श्रमिक लगाए गए हैं और उन्हें प्रतिदिन का वेतनमान कुशल ठेका श्रमिक से भी कम दिया जा रहा है जबकि उनसे कार्य कुशल ठेका श्रमिक का कराया जा रहा है इस विषय पर श्रमिक संगठन द्वारा भी जिला श्रम अधिकारी को पत्र देकर जांच की मांग की गई।

श्रमिक संघ के महामंत्री विनोद भारती एवं वरिष्ठ सदस्य सुधीर पाल ने बताया कि कोल हैंडलिंग प्लांट में ही बड़ोदरा की रवि एनर्जी कंपनी द्वारा भी कोल सैंपलिंग का कार्य किया जा रहा है जिसमें पूर्व में 21 ठेका श्रमिक कार्यरत थे परन्तु वर्तमान में 18 ठेका श्रमिक काम कर रहे हैं दोनों ही स्थान पर एक जैसा काम कराया जा रहा है परंतु ठेका श्रमिकों के वेतनमान में भिन्नता है एवं इन कार्यों में कार्यरत ठेका श्रमिकों को एरियस का भुगतान भी विधि अनुरूप नहीं हुआ है
ठेका श्रमिकों के शोषण के मामले में आरती इंटरप्राइजेज के प्रो. प्रेम सातनकर पर दिनांक 01/12/2020 को थाना सारणी मे ठेका श्रमिकों के शोषण के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है।

यह एफआईआर प्लांट प्रबंधन के वर्क आर्डर आदेश क्रमांक 505/0600/w-64/1095, सारणी, दिनांक 14/10/2020 के तहत दर्ज की गई जिसमें अपराध क्रमांक 612/20 हैं जिसमें फरियादी ठेका श्रमिक गुलाब बचले, सागर चंदेल, कमलेश वस्त्रराने, विक्की बार पेटे, रामदयाल यादव, रहे हैं
इस कार्रवाई के बाद भी इनके द्वारा ठेका श्रमिकों का शोषण बंद नहीं किया गया
कोल हैंडलिंग प्लांट मे ठेका श्रमिकों के शोषण के कई मामले सामने आ रहे हैं इन घटनाक्रम से स्थानीय प्लांट प्रबंधन के श्रम कल्याण अधिकारी एवं जिला श्रम अधिकारी की कार्य शैली पर भी अब प्रश्न उठने लगे हैं प्लांट प्रबंधन द्वारा श्रमिकों से जुड़े मामलों को देखने के लिए श्रम कल्याण अधिकारी नियुक्त है और मध्य प्रदेश शासन द्वारा जिला श्रम अधिकारी नियुक्त है इन अधिकारियों के निगरानी के बावजूद भी ठेका श्रमिकों का शोषण हो रहा है।




