
cm mohan yadav action मध्य प्रदेश में राजस्व और जमीनी मामलों में झूठी शिकायतें कर कॉलोनाइजरों व आम नागरिकों को ब्लैकमेल करने वाले तत्वों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि यदि जांच में कोई भी शिकायत झूठी या दुर्भावनापूर्ण (Malicious) पाई जाती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए.
cm mohan yadav action सरकार को लगातार यह फीडबैक मिल रहा था कि थानों और सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) पर एक ही विषय को लेकर बार-बार शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं, जिसका उद्देश्य केवल संबंधित पक्षों पर दबाव बनाना और ब्लैकमेल करना होता है.
पुलिस की दादागिरी पर भी लगेगी लगाम
मुख्यमंत्री ने न सिर्फ झूठे आवेदकों बल्कि पुलिस महकमे के उन अधिकारियों को भी कड़ा संदेश दिया है जो इन शिकायतों का नाजायज फायदा उठाते हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पुलिस अधिकारी झूठी शिकायत के आधार पर किसी कॉलोनाइजर को अनावश्यक रूप से डराता-धमकाता है या कार्रवाई का भय दिखाता है, तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने राजस्व और पुलिस विभाग दोनों को पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम करने की हिदायत दी है.
हर जिले में गठित हुआ ‘कॉलोनी सेल’
cm mohan yadav action जमीन से जुड़े विवादों को जड़ से खत्म करने और प्लॉट खरीदने वाले आम नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है. मुख्यमंत्री ने बताया कि:
- प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक समर्पित ‘कॉलोनी सेल’ का गठन किया गया है.
- इस सेल में एसडीएम (SDM), राजस्व निरीक्षक (RI) और पटवारी स्तर के सक्षम अधिकारी शामिल हैं.
- किसी भी कॉलोनी या भूखंड की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले जमीन के असली दस्तावेज, मालिकाना हक (स्वामित्व), सर्वे नंबर और अन्य सभी सरकारी रिकॉर्ड की गहन जांच की जाती है.
- इस त्रिस्तरीय व्यवस्था का उद्देश्य कॉलोनाइजर और प्लॉट खरीदार दोनों को धोखाधड़ी से बचाना है.
इस नए आदेश के बाद अब थानों और विभिन्न सरकारी पोर्टलों पर आने वाली जमीनी शिकायतों की पहले राजस्व अधिकारियों के माध्यम से प्राथमिक स्क्रूटनी की जाएगी, जिसके बाद ही कोई पुलिसिया कार्रवाई अमल में लाई जा सकेगी.



