
JANMASHTAMI
एमपी के स्कूलों में जन्माष्टमी मनाना अनिवार्य, आदेश जारी होते ही राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज़
भोपाल। मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने राज्य के सभी सरकारी और सरकार से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के लिए एक नया और कड़ा निर्देश जारी किया है। इस सरकारी आदेश के तहत अब प्रदेश के सभी स्कूलों में ‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी’ का पर्व मनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
3 दिनों तक चलेंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह कोई एक दिन का आयोजन नहीं होगा। स्कूलों में 1 सितंबर से 3 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय भव्य सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन तीन दिनों के दौरान स्कूलों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके दर्शन और भारतीय संस्कृति पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताएं, नाटक और व्याख्यान आयोजित करने होंगे।
फैसले पर क्यों छिड़ी है बहस?
आदेश के सामने आते ही राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बयानबाजी और बहस का दौर बेहद तेज़ हो गया है:
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- समर्थन करने वालों का पक्ष: इस फैसले का समर्थन कर रहे लोगों और संगठनों का कहना है कि स्कूलों में ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति, इतिहास और नैतिक मूल्यों को समझने का मौका मिलेगा। यह कदम भारतीय संस्कारों को बढ़ावा देने वाला है।
- विरोध और सवाल उठाने वालों का पक्ष: दूसरी तरफ, इस फैसले को अनिवार्य (Compulsory) बनाए जाने पर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि किसी भी धार्मिक त्योहार को सभी स्कूलों और बच्चों के लिए अनिवार्य करना शिक्षा के धर्मनिरपेक्ष (Secular) ढांचे के खिलाफ हो सकता है।
फिलहाल इस आदेश को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनैतिक गलियारों तक चर्चाएं गर्म हैं, और देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देता है।