
भोपाल/नई दिल्ली: यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ( united forum of bank unions) के आह्वान पर हुई राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के सफल होने के बाद बैंक कर्मचारी संगठनों ने सरकार और प्रबंधन के खिलाफ अपने आंदोलन को और तेज करने का मन बना लिया है।
कर्मचारी नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 5-डे बैंकिंग सहित उनकी अन्य लंबित मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो 28 सितंबर 2026 से तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की जाएगी और इसके बाद 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन तालाबंदी का रास्ता अपनाया जाएगा।
बैंक संगठनों का कहना है कि 11 सितंबर की हड़ताल केवल एक चेतावनी थी। अगर सरकार ने अब भी उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में देश की पूरी बैंकिंग व्यवस्था ठप कर दी जाएगी।
आंदोलन की आगामी रूपरेखा और महत्वपूर्ण तिथियाँ: united forum of bank unions
कर्मचारी यूनियनों द्वारा जारी आधिकारिक रणनीति के अनुसार, आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा:
- 21 से 25 सितंबर: देश भर के सभी क्षेत्रीय और आंचलिक बैंक कार्यालयों के बाहर कर्मचारी काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे और भोजनावकाश (Lunch Hour) के दौरान गेट मीटिंग कर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
- 28 से 30 सितंबर (तीन दिवसीय हड़ताल): सितंबर के अंतिम सप्ताह में लगातार 3 दिनों तक देशव्यापी बैंक हड़ताल रहेगी, जिससे त्योहारों के ठीक पहले वित्तीय लेनदेन पर भारी असर पड़ने की आशंका है।
- 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल: यदि तीन दिवसीय हड़ताल के बाद भी केंद्र सरकार या इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो 26 अक्टूबर से बैंक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे, जो मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी।
5-डे बैंकिंग पर आर-पार की लड़ाई:
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (united forum of bank unions) के पदाधिकारियों के अनुसार, सरकार पिछले दो वर्षों से हर शनिवार की छुट्टी (5-Day Work Week) के प्रस्ताव को दबाकर बैठी है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि बैंकर्स पर काम का भारी मानसिक तनाव है, जिसे दूर करने के लिए दो दिन का साप्ताहिक अवकाश बेहद जरूरी है। इसके बदले में कर्मचारी सोमवार से शुक्रवार तक हर दिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को भी तैयार हैं, लेकिन प्रबंधन का अड़ियल रवैया इस मुद्दे को सुलझने नहीं दे रहा है।
यदि यह प्रस्तावित हड़तालें होती हैं, तो आने वाले त्योहारी सीजन में आम जनता को नगद निकासी, चेक क्लियरिंग और व्यापारिक भुगतानों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।






