
ब्यूरो रिपोर्ट
*बेतूल, 8 जनवरी 2026 (समाचार ब्यूरो):* बेतूल जिला अदालत ने एक महत्वपूर्ण चेक बाउंस मामले में आरोपी *धर्मदास यादव* (पिता कन्हैयालाल यादव, उम्र 45 वर्ष, निवासी हनुमान मंदिर के पास, गौठाना वार्ड, बेतूल) को दोषी करार देते हुए *1 वर्ष* की साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती संघप्रिया भद्रसेन की अदालत ने परिवादी रिजवाना खान को कुल *1,98,750 रुपये* (चेक राशि 1,75,000 + ब्याज 15,750 + अदालती फीस 8,000) का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला नेगोशिएबल इंस्ट्रुमेंट्स एक्ट, 1881 की *धारा 138* के तहत आया है।
मामले के अनुसार, आरोपी धर्मदास यादव ने परिवादी रिजवाना खान (उम्र 30 वर्ष, निवासी गौठाना वार्ड, बेतूल) से व्यक्तिगत जरूरत बताकर कुल 1,75,000 रुपये उधार लिए थे। बदले में उन्होंने ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक, बेतूल का चेक क्रमांक 000012, दिनांक 10-06-2023 जारी किया। चेक बैंक में जमा करने पर “अपर्याप्त धनराशि” के कारण बाउंस हो गया। परिवादी ने 17-07-2023 को रजिस्टर्ड डाक से डिमांड नोटिस भेजा, लेकिन आरोपी ने राशि नहीं चुकाई। अदालत ने परिवादी के सबूतों—मूल चेक, बैंक रिटर्न मेमो, डिमांड नोटिस, बैंक स्टेटमेंट और गवाहों के बयानों—को निर्णायक मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया।
आरोपी ने दावा किया कि चेक गारंटी के तौर पर दिया गया था और परिवादी ब्याज का धंधा करती है, लेकिन अदालत ने इन दावों को खारिज कर दिया। आरोपी की ओर से गवाह मेघा लडके (भतीजी) ने भी बयान दिया, लेकिन क्रॉस-एक्जामिनेशन में विरोधाभास उजागर हुए।
इस फैसले में परिवादी पक्ष के अधिवक्ता *श्री भारत सेन* की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। श्री सेन ने मामले की शुरुआत से अंत तक रणनीतिक ढंग से नेतृत्व किया। उन्होंने परिवादी की ओर से मजबूत दस्तावेजी और मौखिक सबूत पेश किए, जिसमें चेक के हस्ताक्षर की पुष्टि, बैंक स्टेटमेंट और नोटिस की प्राप्ति साबित की। उनके कुशल क्रॉस-एक्जामिनेशन ने आरोपी और उसके गवाह के बयानों में कमजोरियां उजागर कीं, जिससे धारा 139 के तहत प्रेसुम्प्शन (चेक ऋण या दायित्व के निर्वहन के लिए दिया गया माना जाएगा) मजबूत हुआ। श्री सेन ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी द्वारा पेश किए गए बचाव के दावे अपर्याप्त थे और एनआई एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन स्पष्ट था।
फैसले के बाद श्री भारत सेन ने कहा, “यह परिवादी की मेहनत की कमाई और विश्वास की रक्षा का मामला था। हमने सुनिश्चित किया कि कानून की सख्ती से ऐसे धोखाधड़ी के मामलों पर अंकुश लगे। यह फैसला बेतूल जिले में अन्य पीड़ितों के लिए प्रेरणा बनेगा।”
अदालत ने आरोपी को अपील का अधिकार दिया है, लेकिन फिलहाल उसे हिरासत में लिया गया है। परिवादी रिजवाना खान ने फैसले पर संतुष्टि जताई और कहा कि न्याय मिलने से उनका भरोसा कायम रहा। यह मामला बेतूल में बढ़ते चेक बाउंस केसों पर न्यायपालिका के सख्त रुख को दर्शाता है।