
ब्यूरो रिपोर्ट
- भीषण गर्मी भी नहीं रोक पाई आस्था, सैकड़ों गौभक्तों की मौजूदगी में निकली गौ सम्मान पदयात्रा
- राष्ट्रमाता दर्जा, वध पर पूर्ण प्रतिबंध और सख्त कानून की मांग
- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
बैतूल। सोमवार को बैतूल शहर में विराट गौ सम्मान पदयात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में गौभक्त शामिल हुए। भीषण गर्मी भी गौभक्तों के हौसले को नहीं तोड़ पाई। राष्ट्रमाता का दर्जा देने, गोवंश वध पर पूर्ण प्रतिबंध और सख्त केंद्रीय कानून बनाने की मांग को लेकर गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत यह पदयात्रा सुबह 11 बजे शिवाजी ऑडिटोरियम से शुरू होकर तहसील कार्यालय पहुंची, जहां महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।
पदयात्रा में भजन-कीर्तन और प्रार्थना के साथ शांतिपूर्ण तरीके से गौभक्त आगे बढ़े और शहर में आस्था का माहौल बना रहा। 9 सूत्रीय मांग पत्र में गौ संरक्षण, गौशालाओं को सहायता, गौ अभ्यारण्य निर्माण, तस्करी पर सख्त कानून और आधुनिक गौ चिकित्सालय स्थापित करने सहित गोवंश को राष्ट्रमाता का संवैधानिक दर्जा देने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।
ज्ञापन में बताया गया कि भारतीय संस्कृति, प्राकृतिक कृषि, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था की आधारशिला मानी जाने वाली गोमाता आज सड़कों, खेतों और गलियों में कष्टपूर्ण स्थिति में भटक रही है। भूख, दुर्घटनाओं, तस्करी और वध के कारण देशी गोवंश की संख्या लगातार घट रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
ज्ञापन में वर्ष 1966 के गोरक्षा आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा गया कि लंबे समय से गोसंरक्षण को लेकर अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए, जबकि अब समय निर्णायक नीति बनाने का है। इसमें प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए गोमाता को संवैधानिक संरक्षण और राष्ट्रीय सम्मान देने की मांग की गई।
प्रस्ताव में गोवंश वध और तस्करी को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध घोषित कर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान करने, अपराध में प्रयुक्त संपत्ति और वाहनों को राजसात करने और पशुपालन विभाग से अलग स्वतंत्र गो-पालन मंत्रालय बनाने की मांग की गई। साथ ही पूरे देश में एक समान केंद्रीय कानून लागू करने का सुझाव दिया गया।
आर्थिक और कृषि क्षेत्र में पंचगव्य अनुसंधान केंद्र स्थापित करने, गोबर और गोमूत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने और किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया। गो आधारित उत्पादों के लिए बाजार व्यवस्था विकसित करने और सरकारी संस्थानों में इनके उपयोग को अनिवार्य करने की भी बात कही गई।
बुनियादी ढांचे में प्रत्येक जिले में गो अभयारण्य, ग्राम पंचायत स्तर पर नंदीशाला, गोशालाओं को अनुदान, चारा प्रबंधन और गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का प्रस्ताव शामिल है। इसके साथ ही बायोगैस प्लांट के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन और मृत गोवंश के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।
स्वास्थ्य और सुरक्षा के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों पर गो-एम्बुलेंस, ट्रॉमा सेंटर और गो चिकित्सालय स्थापित करने, प्रत्येक जिले में पंचगव्य चिकित्सालय खोलने, स्कूलों के पाठ्यक्रम में गोवंश का महत्व शामिल करने और मध्याह्न भोजन योजना में गो दुग्ध उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया।
सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर मंदिरों में केवल देशी गो उत्पादों के उपयोग, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड का हिस्सा गो सेवा में लगाने, सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध और डीजल, पेट्रोल, टोल टैक्स जैसी सेवाओं पर गो-सेस लागू कर गो कल्याण कोष बनाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
अभियान की कार्ययोजना के अनुसार 27 अप्रैल को तहसील स्तर पर ज्ञापन सौंपने के बाद मई से जुलाई तक शासन से संवाद किया जाएगा। इसके बाद जुलाई, अक्टूबर और आगे राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर चरणबद्ध तरीके से आंदोलन बढ़ाया जाएगा। मांगें पूरी नहीं होने पर 2027 में नई दिल्ली में विशाल, अहिंसक जनआंदोलन, संकीर्तन और प्रार्थना के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाया जाएगा।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल के नेतृत्व में नहीं है, गोमाता को प्रधान संरक्षक और नंदी को प्रतीकात्मक अध्यक्ष मानकर देशभर के संत समाज, गोभक्त, गोशाला संचालक और नागरिकों द्वारा स्वस्फूर्त रूप से संचालित किया जा रहा है।





