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Bhopal

नशे के सौदागरों पर कठोर कार्रवाई -नशा बेचने वाले तीन आदतन अपराधियों को केंद्रीय जेल भोपाल भेजा गया

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 ब्यूरो रिपोर्ट 

नशा बेचने वालों के विरुद्ध की गई कमिश्नर श्री दीपक सिंह की कार्रवाई को हाईकोर्ट ने सही ठहराया है। कमिश्नर श्री दीपक सिंह ने गत माह एन डी पी एस एक्ट के तहत उषा उर्फ काली, पांगू बाई उर्फ सरिता और अमीर ख़ान को 6-6 माह के लिए केंद्रीय जेल भोपाल में निरुद्ध कराया था। अधिनियम के तहत इस फ़ैसले की पुष्टि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी कर दी गई है।

    अपराधी पांगू बाई उर्फ सरिता पति स्व. विनय भूरिया, निवासी 121, भील कॉलोनी, मूसाखेडी, इंदौर और उषा उर्फ काली पति रामअवतार वर्मा, निवासी- 858, कुम्हारखाड़ी, बाणगंगा, इंदौर तथा अमीर खान पिता समीर खान उर्फ चमलु खान, निवासी ग्राम देवल्दी, थाना अरनोद, जिला प्रतापगढ़, राजस्थान को नशे का व्यापार करने के कारण कमिश्नर श्री दीपक सिंह ने इंदौर संभाग के जिलों की राजस्व सीमा से 6-6 माह की अवधि के लिए निरुद्ध किया जाकर केंद्रीय जेल भोपाल में रखने के आदेश जारी किए गए थे।

        यह तीनों कुख्यात अपराधी होकर अवैध मादक पदार्थ तस्करी करने में लिप्त है। कई वर्षों से लगातार अपराधों में लिप्त है। अवैध मादक पदार्थ तस्करी करते पकडे जाने के बाद भी पुनः लगातार अवैध मादक पदार्थ की तस्करी कर रहे हैं। अवैध मादक पदार्थ का इनका व्यापार इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों में फैला हुआ है। यह अपने एजेन्ट, बिचौलियों के साथ मिलकर अवैध मादक पदार्थ की खरीद फरोख्त करते व इंदौर शहर में अलग-अलग स्थानों पर अवैध मादक पदार्थ बेचते हैं। इनके विरुद्ध विभिन्न थाना क्षेत्र में अपराध पंजीबद्ध है।

    इनके द्वारा अवैध मादक पदार्थ तस्करी से समाज में विपरीत प्रभाव पड रहा था, अवैध मादक पदार्थ की तस्करी का सीधा प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य से जुडा होता है। पूर्व में भी अवैध मादक पदार्थ तस्करी के प्रकरण में न्यायालय से जमानत का लाभ लेकर पुनः अवैध मादक पदार्थ की खरीद फरोख्त शुरु कर देते हैं। न्यायालय के अभिरक्षा में रहने के उपरांत भी अप्रत्यक्ष रुप से अवैध मादक पदार्थ की तस्करी अपने बिचौलियों के माध्यम से सुव्यवस्थित होकर संचालित करते रहे हैं तथा अवैध मादक पदार्थ की तस्करी में इनके क्रियाकलाप निरंतर जारी है। इनके उक्त कृत्य से लोक व्यवस्था भंग होने की प्रबल संभावना को देखते हुए कमिश्नर श्री दीपक सिंह द्वारा तीनों अपराधियों को स्वापक और मन:प्रभावी  पदार्थ अवैध व्यापार निवारण अधिनियम 1988 के तहत निरूद्ध किया गया है।